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फ्रांस में गहराया राजनीतिक संकट! PM फ्रांस्वा बेरो हारे अविश्वास प्रस्ताव, देंगे इस्तीफा

फ्रांस में गहराया राजनीतिक संकट! PM फ्रांस्वा बेरो हारे अविश्वास प्रस्ताव, देंगे इस्तीफा

फ्रांस की संसद ने सोमवार को प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बेरो के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया, जिससे यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था एक बार फिर राजनीतिक संकट में डूब गई। बेरो, जो केवल नौ महीने पहले दिसंबर 2024 में नियुक्त किए गए थे, को 364-194 के भारी मतों से अविश्वास प्रस्ताव में हार का सामना करना पड़ा। अब उन्हें मंगलवार सुबह राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपना होगा।

क्यों हुआ अविश्वास प्रस्ताव?

बेरो ने अपनी सरकार की 44 अरब यूरो (लगभग 51 अरब डॉलर) की कटौती युक्त बजट योजना के लिए संसद से समर्थन मांगने के लिए स्वयं अविश्वास प्रस्ताव का आह्वान किया था। इस योजना में दो सार्वजनिक अवकाशों को समाप्त करना और सरकारी खर्च पर अंकुश लगाना शामिल था, जिसका विपक्षी दलों ने तीव्र विरोध किया। बेरो ने संसद में कहा, “हमारा देश काम करता है, सोचता है कि यह अमीर हो रहा है, लेकिन वास्तव में गरीब होता जा रहा है।” उन्होंने कर्ज के बोझ को “जीवन के लिए खतरा” बताते हुए इस योजना को जरूरी ठहराया, लेकिन विपक्ष ने इसे जनविरोधी करार दिया।

मैक्रों के लिए बढ़ी मुश्किलें

यह फ्रांस में पिछले एक साल में तीसरी बार है, जब सरकार अविश्वास प्रस्ताव के कारण गिरी है। मैक्रों को अब दो साल से भी कम समय में अपने पांचवें प्रधानमंत्री की तलाश करनी होगी। इससे पहले गैब्रियल अटाल (सितंबर 2024) और मिशेल बार्नियर (दिसंबर 2024) भी अविश्वास प्रस्ताव में हार चुके हैं। जून 2024 में मैक्रों द्वारा नेशनल असेंबली को भंग करने और नए चुनाव कराने का उनका दांव उल्टा पड़ गया, जिसके परिणामस्वरूप संसद में कोई भी दल बहुमत हासिल नहीं कर सका।

विपक्ष की एकजुटता और मांग

दक्षिणपंथी नेशनल रैली की नेता मरीन ले पेन और वामपंथी ला फ्रांस अनबाउड ने बेरो की नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर मतदान किया। ले पेन ने मैक्रों से तत्काल नए संसदीय चुनाव कराने की मांग की है, ताकि देश में राजनीतिक स्थिरता बहाल हो सके। उन्होंने कहा, “यह सरकार का अंत है, और अब मैक्रों के पास नया चुनाव कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।”

आगे क्या?

मैक्रों के सामने अब कठिन विकल्प हैं: या तो वे एक नया प्रधानमंत्री नियुक्त करें, जो संसद में बहुमत हासिल कर सके, या फिर नए चुनाव बुलाएं, जो उनकी सेंट्रिस्ट गठबंधन के लिए जोखिम भरा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संसद की मौजूदा स्थिति में किसी भी नए प्रधानमंत्री के लिए बजट पारित करना और स्थिरता लाना चुनौतीपूर्ण होगा। फ्रांस की वित्तीय स्थिति गंभीर है, जहां 2024 में घाटा यूरोपीय संघ की 3% की सीमा से दोगुना रहा और सार्वजनिक कर्ज जीडीपी के 113.9% तक पहुंच गया है।

वैश्विक प्रभाव

फ्रांस की इस अस्थिरता का असर न केवल घरेलू नीतियों, बल्कि यूक्रेन और गाजा जैसे वैश्विक मुद्दों पर मैक्रों की कूटनीतिक पहल पर भी पड़ सकता है। वित्तीय बाजारों में भी अनिश्चितता बढ़ने की आशंका है, क्योंकि निवेशक फ्रांस की आर्थिक स्थिरता पर सवाल उठा रहे हैं।

मैक्रों ने घोषणा की है कि वे जल्द ही नया प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे, लेकिन राजनीतिक गतिरोध और विपक्षी दलों की एकजुटता के बीच यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी। फ्रांस की यह स्थिति 1958 में पांचवें गणराज्य की स्थापना के बाद से सबसे गंभीर राजनीतिक संकटों में से एक मानी जा रही है।

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