उत्तराखंड शिक्षा विभाग में 3.18 करोड़ का घोटाला: SIT को सौंपी गई जांच, छह जिला शिक्षा अधिकारी शक के घेरे में
उत्तराखंड शिक्षा विभाग में 3.18 करोड़ का घोटाला: SIT को सौंपी गई जांच, छह जिला शिक्षा अधिकारी शक के घेरे में
उत्तराखंड शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। प्रधानमंत्री पोषण योजना (मिड-डे मील) और शक्ति निर्माण योजना के तहत 3.18 करोड़ रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घोटाले की जांच के लिए शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विशेष जांच दल (SIT) को जिम्मेदारी सौंपी है। जांच में एक उपनल कर्मचारी को मुख्य दोषी पाया गया है, जबकि छह जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और वित्त व लेखाधिकारियों की लापरवाही भी उजागर हुई है।
घोटाले का खुलासा
देहरादून में पीएम पोषण प्रकोष्ठ में दो महीने पहले वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। विभागीय जांच में पता चला कि 2023-24 से 2025-26 के बीच 3.18 करोड़ रुपये की राशि को ऑनलाइन माध्यम से अज्ञात खातों में ट्रांसफर किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) देहरादून के कार्यालय में कार्यरत उपनल कर्मचारी नवीन सिंह रावत को इस गबन का मास्टरमाइंड बताया गया है। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान दो से तीन DEO बदले गए, लेकिन किसी को इस घपले की भनक तक नहीं लगी।
जांच और कार्रवाई
गढ़वाल मंडल की अपर शिक्षा निदेशक कंचन देवराड़ी की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने प्रारंभिक रिपोर्ट में गबन की पुष्टि की और उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश की। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए SIT जांच को मंजूरी दी। उन्होंने कहा, “सरकारी धन की हेराफेरी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होगी।”
लापरवाही पर सवाल
जांच में सामने आया कि छह DEO (बेसिक) और वित्त व लेखाधिकारियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया, जिसके कारण बिना जांच के फंड ट्रांसफर होता रहा। शिक्षा विभाग ने अब गोपनीय और वित्तीय कार्यों को केवल स्थायी कर्मचारियों को सौंपने का फैसला किया है। साथ ही, पीएम पोषण योजना के खातों के संचालन पर सख्ती बरती जाएगी।
सियासी और सामाजिक प्रभाव
यह घोटाला ऐसे समय में सामने आया है, जब उत्तराखंड में मानसून आपदा से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र से राहत पैकेज की मांग की जा रही है। विपक्ष ने इस मामले को लेकर धामी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने कहा, “शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।” सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इसे “शर्मनाक” बताया और पारदर्शिता की मांग की।
भविष्य की योजना
शिक्षा मंत्री ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही है। SIT की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि क्या बड़े अधिकारियों को इस घोटाले की जानकारी थी। साथ ही, विभाग ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नए दिशानिर्देश जारी करने की योजना बनाई है।
