‘आइडिया सही, लेकिन टाइमिंग गलत’, बिहार SIR पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने उठाए सवाल
‘आइडिया सही, लेकिन टाइमिंग गलत’, बिहार SIR पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने उठाए सवाल
बिहार में विशेष गहन संशोधन (SIR) के जरिए मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने तीखा सवाल उठाया है। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2025 के मंच पर रविवार को रावत ने कहा कि SIR का विचार तो सही है, लेकिन इसकी टाइमिंग गलत है। उन्होंने बिहार में बाढ़ और भारी बारिश के बीच मतदाताओं से दस्तावेज जमा करने की मांग को अव्यवहारिक बताया। रावत के साथ पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और अशोक लवासा ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी।
रावत ने कहा, “बिहार में SIR के तहत 11 दस्तावेजों में से एक जमा करने को कहा गया है, लेकिन जब बाढ़ और मॉनसून तबाही मचा रहे हैं, गरीब लोग आजीविका चलाएं या दस्तावेज जुटाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटें?” उन्होंने बताया कि SIR आखिरी बार 2003 में हुआ था और यह हर 10-20 साल में होता है। लेकिन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इसकी शुरुआत से संसाधन-विहीन मतदाताओं पर बोझ बढ़ गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि SIR का मकसद डुप्लिकेट वोटर प्रविष्टियों को हटाना और मतदाता सूची को शुद्ध करना है, न कि मतदाताओं को अपराधी बनाना। रावत ने बताया कि ERO-नेट सिस्टम के जरिए पहले भी डुप्लिकेट प्रविष्टियों का पता लगाया जाता था, और मतदाताओं को नोटिस देकर उनकी पसंद के मतदान क्षेत्र में नाम रखने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी।
विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने SIR को दलित, आदिवासी और मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। रावत ने कहा कि चुनाव के करीब आने पर “काल्पनिक मुद्दे” उछलने लगते हैं, लेकिन मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायतों को दूर करना जरूरी है।
