उत्तराखंड में ऑपरेशन कालनेमी: धोखाधड़ी और धर्मांतरण पर पुलिस का शिकंजा, 1182 पर कार्रवाई, 300 से अधिक गिरफ्तार
उत्तराखंड में ऑपरेशन कालनेमी: धोखाधड़ी और धर्मांतरण पर पुलिस का शिकंजा, 1182 पर कार्रवाई, 300 से अधिक गिरफ्तार
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शुरू किए गए ‘ऑपरेशन कालनेमी’ के तहत पुलिस ने धोखाधड़ी और धर्मांतरण के मामलों में सख्त कार्रवाई तेज कर दी है। इस अभियान में अब तक 5500 से अधिक लोगों का सत्यापन किया गया, जिसमें 1182 व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और 300 से अधिक को गिरफ्तार किया गया है। हरिद्वार और देहरादून जैसे संवेदनशील जिलों में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई, जहां क्रमशः 2704 और 922 लोगों का सत्यापन किया गया।
ऑपरेशन कालनेमी का उद्देश्य
‘ऑपरेशन कालनेमी’ का नाम पौराणिक राक्षस कालनेमि से प्रेरित है, जो साधु का वेश धरकर लोगों को भ्रमित करता था। इसका उद्देश्य उन असामाजिक तत्वों को चिह्नित करना है जो धार्मिक वेशभूषा या झूठी पहचान के जरिए ठगी, धोखाधड़ी और जबरन धर्मांतरण जैसी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि “देवभूमि की पवित्रता और लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
कार्रवाई का विवरण
– हरिद्वार: 2704 सत्यापन, 162 गिरफ्तारियां, जिसमें एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल।
– देहरादून: 922 सत्यापन, 113 गिरफ्तारियां, जिसमें 48 फर्जी भगवाधारी पकड़े गए।
– उधम सिंह नगर: 167 सत्यापन, 17 गिरफ्तारियां।
– कुल मिलाकर, 13 जिलों में 4000 से 5500 लोगों का सत्यापन हुआ, और 140 से 300 गिरफ्तारियां दर्ज की गईं। पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में पहचान पत्र, निवास प्रमाण और दस्तावेजों की गहन जांच की।
धर्मांतरण कानून का असर
2022 में लागू उत्तराखंड धर्म-स्वतंत्रता अधिनियम के तहत जबरन धर्मांतरण को गैर-जमानती अपराध घोषित किया गया है, जिसमें 2 से 10 साल की सजा और 25,000 से 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। हाल ही में छांगुर बाबा गिरोह के पांच सदस्यों के खिलाफ इस कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस और सरकार का संदेश
आईजी कानून व्यवस्था नीलेश आनंद भरणे ने कहा, “ऑपरेशन कालनेमी समाज को सकारात्मक संदेश दे रहा है। जो लोग सनातन संस्कृति और आस्था का दुरुपयोग करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।” एसएसपी देहरादून की निगरानी में यह अभियान हरिद्वार, ऋषिकेश और केदारनाथ जैसे तीर्थस्थलों पर विशेष रूप से सक्रिय है।
सामाजिक और धार्मिक महत्व
उत्तराखंड, जिसे ‘देवभूमि’ कहा जाता है, हर साल लाखों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है। इस अभियान का मकसद धार्मिक भावनाओं की रक्षा करना और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना है। मुख्यमंत्री धामी ने इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा का ऐतिहासिक कदम बताया है।
