चंद्र ग्रहण से पहले बाढ़ और भूस्खलन का कहर: ज्योतिषविद ने बताया राहु-केतु और चंद्रमा का योग है वजह
चंद्र ग्रहण से पहले बाढ़ और भूस्खलन का कहर: ज्योतिषविद ने बताया राहु-केतु और चंद्रमा का योग है वजह
भारत के कई हिस्सों में चंद्र ग्रहण से ठीक पहले भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचाई है। दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में यमुना, सतलुज, ब्यास, रावी और चिनाब जैसी नदियां उफान पर हैं। केंद्रीय जल आयोग की 5 सितंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, देश की 24 नदियां गंभीर बाढ़ की स्थिति में हैं, और 50 डैम बाढ़ के सेंसिटिव जोन में हैं। इस बीच, ज्योतिषविदों ने दावा किया है कि 7 सितंबर 2025 को लगने वाला पूर्ण चंद्र ग्रहण इस प्राकृतिक आपदा की वजह हो सकता है, क्योंकि राहु-केतु और चंद्रमा का योग प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ावा देता है।
ज्योतिषविद के अनुसार, “पूर्णिमा तिथि पर चंद्र ग्रहण के दौरान राहु और चंद्रमा का योग बनता है, जो वैदिक ज्योतिष में प्राकृतिक आपदाओं का संकेत देता है। चंद्रमा जल और वनस्पतियों का कारक है, इसलिए इस दौरान बाढ़, भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है।” उन्होंने बताया कि यह ग्रहण कुंभ राशि और पूर्वभाद्रपद नक्षत्र में लगेगा, जो पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष रूप से भूस्खलन और जल सैलाब की संभावना को बढ़ाता है। हाल की घटनाएं, जैसे जम्मू-कश्मीर में चिनाब और तवी नदियों का उफान, वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन, और उत्तराखंड के धराली में बादल फटने से आई बाढ़, इस ज्योतिषीय दावे को बल देती हैं।
वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण: वैज्ञानिक रूप से, चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है, जिससे चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है। इस दौरान गुरुत्वाकर्षण बलों का संयोजन महासागरों में ज्वार-भाटा को तीव्र करता है, जिससे तटीय और नदी क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ता है। ज्योतिष शास्त्र में इसे राहु-केतु के प्रभाव से जोड़ा जाता है, जो पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य और चंद्रमा से बदला लेने के लिए ग्रहण का कारण बनते हैं। शास्त्री ने कहा, “यह संयोग जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर प्राकृतिक आपदाओं को और भयावह बना रहा है।”
प्रभावित क्षेत्र और स्थिति: पंजाब में 37 साल बाद सबसे भयावह बाढ़ ने 23 जिलों के 1,655 गांवों को प्रभावित किया, जिसमें 37 लोगों की मौत हो चुकी है। दिल्ली में यमुना 207 मीटर के खतरे के निशान को पार कर गई, जिससे कश्मीरी गेट और मयूर विहार जैसे इलाके जलमग्न हैं। उत्तराखंड में 520 सड़कें बंद हैं, और चार धाम यात्रा स्थगित है। हिमाचल में भूस्खलन ने कई हाईवे ध्वस्त कर दिए, जबकि बिहार में गंगा और कोसी नदियां उफान पर हैं।
ज्योतिषीय सावधानियां और उपाय: ज्योतिषविदों ने सुझाव दिया कि ग्रहण के दौरान मंत्र जाप, ध्यान और पितृदोष निवारण के लिए पूजा-पाठ करना फायदेमंद हो सकता है। शास्त्री ने कहा, “शतभिषा और पूर्वभाद्रपद नक्षत्र में जन्मे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।” ग्रहण भारत में दृश्यमान होगा, और इसका सूतक काल 7 सितंबर को सुबह 9:21 से शुरू होकर शाम 6:18 बजे समाप्त होगा। इस दौरान शुभ कार्य वर्जित रहेंगे।
सरकारी कार्रवाई: केंद्र और राज्य सरकारों ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। एनडीआरएफ और सेना प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हैं। पीएम मोदी ने स्थिति की समीक्षा की और राज्यों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन और अनियोजित विकास को भी इन आपदाओं का कारण बताया।
