जामसांडेकर मर्डर केस: 17 साल बाद जेल से बाहर आया ‘दगड़ी का डॉन’ अरुण गवली
जामसांडेकर मर्डर केस: 17 साल बाद जेल से बाहर आया ‘दगड़ी का डॉन’ अरुण गवली
मुंबई, 3 सितंबर 2025: मुंबई के कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन से राजनेता बने अरुण गवली उर्फ ‘डैडी’ को 17 साल की लंबी कैद के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है। बुधवार को नागपुर सेंट्रल जेल के दरवाजे खुलते ही गवली बाहर आ गए, जहां परिवार, समर्थक और वकीलों ने उनका जोरदार स्वागत किया। 76 वर्षीय गवली को सुप्रीम कोर्ट ने 28 अगस्त को जमानत दी, जो 2007 के चर्चित शिवसेना पार्षद कमलाकर जामसांडेकर हत्या मामले से जुड़ी है। इस फैसले ने अपराध और राजनीति की दुनिया में एक बार फिर हलचल मचा दी है।
गवली का अपराधी जीवन मुंबई के दगड़ी चॉल से शुरू हुआ। 1990 के दशक में वे संगठित अपराध में सक्रिय हो गए और ‘अखिल भारतीय सेना’ पार्टी की स्थापना की। 2004 में चिंचपोकली विधानसभा सीट से विधायक चुने गए, लेकिन अपराध के आरोपों से बच नहीं सके। 2007 में घाटकोपर में जामसांडेकर की हत्या का केस उनके खिलाफ सबसे बड़ा साबित हुआ। जांच में पता चला कि गवली ने 30 लाख रुपये की सुपारी लेकर प्रताप गोडसे जैसे शार्प शूटर्स को हत्या के लिए भेजा था। जामसांडेकर का संपत्ति विवाद से जुड़ा यह मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका था। 2006 में गिरफ्तार होने के बाद 2012 में मुंबई सत्र अदालत ने उन्हें MCOCA के तहत उम्रकैद और 17 लाख रुपये जुर्माना सुनाया। 2019 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखी।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की अगुवाई में गवली की अपील पर जमानत दी, क्योंकि वे 17 साल से ज्यादा जेल में हैं और अपील फरवरी 2026 तक लंबित है। कोर्ट ने स्वास्थ्य और उम्र को आधार बनाया। रिहाई के बाद मुंबई और नागपुर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। गवली के समर्थक उन्हें राजनीति में वापसी का संकेत दे रहे हैं, खासकर आगामी बीएमसी चुनावों को देखते हुए। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने पहले समय पूर्व रिहाई का विरोध किया था, दावा करते हुए कि गवली पर 46 से ज्यादा मामले हैं, जिनमें 10 हत्या से जुड़े।
गवली की रिहाई अपराध-राजनीति के गठजोड़ को फिर से उजागर करती है। क्या वे अब शांतिपूर्ण जीवन जिएंगे या पुरानी दुनिया में लौटेंगे? यह सवाल मुंबई की सड़कों पर गूंज रहा है।
