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उत्तराखंड में भारी बारिश का रेड अलर्ट: चंपावत से देहरादून तक 24 घंटों में तूफान-बिजली की चेतावनी, जागरूक रहें नागरिक

उत्तराखंड में भारी बारिश का रेड अलर्ट: चंपावत से देहरादून तक 24 घंटों में तूफान-बिजली की चेतावनी, जागरूक रहें नागरिक

उत्तराखंड में मानसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों (31 अगस्त 2025 दोपहर 12:51 बजे से 1 सितंबर 2025 दोपहर 12:51 बजे तक) के लिए चंपावत, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, पौड़ी, टिहरी और ऊधम सिंह नगर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, इस दौरान रुद्रपुर, हल्द्वानी, काशीपुर, कोटद्वार, मसूरी, खटीमा, श्रीनगर, चकराता, रुड़की, लक्सर, भगवानपुर, विकासनगर, देवप्रयाग और इनके आसपास के इलाकों में अलग-अलग जगहों पर तूफान, बिजली चमकने और बहुत तीव्र से अत्यधिक तीव्र बारिश होने की पूरी संभावना है। यह अलर्ट हाल की भारी बारिश से हुए नुकसान को देखते हुए और भी गंभीर है, जहां पहले ही सड़कें बंद हो चुकी हैं और नदियां उफान पर हैं।

पिछले कुछ दिनों से उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने कई जिलों में तबाही मचा दी है। देहरादून में 174 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि कोटद्वार में 170 मिमी और लैंसडाउन में 150 मिमी। इससे 100 से ज्यादा सड़कें अवरुद्ध हो गईं, चार धाम यात्रा प्रभावित हुई और भूस्खलन से कई गांव कट गए। पौड़ी गढ़वाल में बादल फटने से घर-मकान बह गए, जबकि उत्तरकाशी के धराली इलाके में पूरा गांव पानी में डूब गया। हरिद्वार में रानीपुर मोड़ और भगत सिंह चौक जैसे इलाके जलमग्न हो गए, जिससे व्यापारियों और निवासियों को भारी परेशानी हुई। बागेश्वर में 12 सड़कें बंद होने से 50 गांव मुख्यालय से कट गए। नदियों का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच गया है, जैसे गंगा चेतावनी रेखा से ऊपर बह रही है। रुद्रप्रयाग में हाल ही के बादल फटने से 15 लोगों की मौत हो चुकी है और 20 लापता हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिला मजिस्ट्रेटों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

इस रेड अलर्ट के मद्देनजर, कई जिलों में स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। देहरादून, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत और पौड़ी गढ़वाल में कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी-निजी स्कूल आज बंद रहेंगे। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की टीमें राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन पहाड़ी इलाकों में पहुंच मुश्किल हो रही है। निर्माण कार्य रोक दिए गए हैं और नदियों-नालों से दूर रहने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए अलर्ट सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है। केंद्र सरकार से अतिरिक्त फंड की मांग भी की गई है।

नागरिकों से अपील है कि जागरूक रहें और सतर्क रहें। अनावश्यक यात्रा न करें, घरों में रहें और रेडियो-टीवी पर अपडेट सुनें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद लें। डायल करें: 112 (पुलिस/एम्बुलेंस), 1070 (एसडीआरएफ) या 1077 (टोल-फ्री हेल्पलाइन)। यह अलर्ट न सिर्फ जानमाल के नुकसान को रोक सकता है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बचाएगा। उम्मीद है कि जल्द ही मौसम सुधरेगा और प्रभावितों को राहत मिलेगी।

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