अल्मोड़ा में मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमा स्थापित, पूजा को उमड़े भक्त
कुमाऊं में मां नंदा-सुनंदा का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। अल्मोड़ा और नैनीताल में भक्तों का उत्साह चरम पर है, क्योंकि अष्टमी के पवित्र दिन मां नंदा-सुनंदा के दर्शन शुरू हो गए हैं। अल्मोड़ा में कदली वृक्षों से बनी मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई, जिसके बाद चंद वंशजों ने देर रात तक पूजा-अर्चना की। दूसरी ओर, नैनीताल के नैना देवी मंदिर में भी मां नंदा-सुनंदा अपनी मायके यात्रा पर पहुंचीं, जहां उनकी मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के साथ भव्य उत्सव शुरू हुआ।
अल्मोड़ा में नंदा-सुनंदा पर्व का आयोजन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से खास है। स्थानीय कारीगरों ने कदली वृक्षों से मां की मूर्तियां बनाईं, जो पर्यावरण के प्रति सम्मान का प्रतीक हैं। प्राण प्रतिष्ठा के बाद चंद वंश के लोग, जो मां नंदा को अपनी कुलदेवी मानते हैं, ने विशेष पूजा की। मंदिरों में रात भर भक्ति भजनों का दौर चला, और भक्तों ने मां से सुख-शांति की कामना की। आज अष्टमी के दिन मंदिर के कपाट खुले, और हजारों भक्त मां के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। स्थानीय निवासी ने कहा, “मां नंदा का आशीर्वाद हमारे लिए सब कुछ है। यह पर्व हमारी संस्कृति की आत्मा है।”
नैनीताल में भी मां नंदा-सुनंदा की मायके यात्रा का उत्साह देखने लायक है। नैना देवी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद भक्तों की भीड़ जमा हो गई। मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि मां नंदा को कुमाऊं की रक्षक माना जाता है, और उनकी यह यात्रा भक्तों के लिए विशेष अवसर है। मंदिर समिति ने दर्शन के लिए व्यवस्था की है, ताकि भक्त आसानी से मां का आशीर्वाद ले सकें।
यह पर्व कुमाऊं की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है, जो हर साल भाद्रपद मास की अष्टमी को मनाया जाता है। मां नंदा-सुनंदा को हिमालय की बेटी माना जाता है, और उनकी पूजा से क्षेत्र में समृद्धि और शांति की कामना की जाती है। इस बार मौसम विभाग के रेड अलर्ट के बावजूद भक्तों का जोश कम नहीं हुआ। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। यह उत्सव न सिर्फ आध्यात्मिक, बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। मां नंदा के भक्तों का कहना है कि यह पर्व कुमाऊं की पहचान को और मजबूत करता है।
