जम्मू-कश्मीर में भारी तबाही: रियासी में भूस्खलन से 7 की मौत, रामबन में बादल फटने से 4 की जान गई
जम्मू-कश्मीर में भारी तबाही: रियासी में भूस्खलन से 7 की मौत, रामबन में बादल फटने से 4 की जान गई
जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश ने एक बार फिर कहर बरपा दिया है। रियासी जिले के महौर इलाके में भूस्खलन से एक परिवार के 7 सदस्यों की मौत हो गई, जबकि रामबन जिले के राजगढ़ क्षेत्र में बादल फटने से 4 लोगों की जान चली गई। कई लोग अभी भी लापता हैं और बचाव कार्य जारी है। ये घटनाएं इस महीने की तीसरी बड़ी प्राकृतिक आपदा हैं, जिसमें अब तक 46 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
रियासी में सुबह करीब 3 बजे भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिसमें नाजिर अहमद (38), उनकी पत्नी वजिरा बेगम (35) और उनके 5 छोटे बच्चे (उम्र 4, 6, 8, 10 और 12 साल) मलबे में दबकर मर गए। उनका घर पूरी तरह तबाह हो गया। स्थानीय लोग सुबह ही घटना के बारे में जान पाए और उन्होंने 3-4 घंटे की मशक्कत के बाद शव निकाले। एसडीपीओ महौर वकार यूनुस ने बताया कि बचाव टीम मौके पर पहुंच गई है और इलाके में और खतरे की आशंका को देखते हुए लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजा जा रहा है।
इधर, रामबन के राजगढ़ तहसील में रात करीब 12:30 बजे बादल फटने से तेज बाढ़ आ गई। इससे 3 लोग बह गए, जिनमें 2 महिलाएं शामिल हैं। दो लोग अभी भी लापता हैं, जबकि 5 अन्य की तलाश जारी है। बाढ़ ने कई घरों और एक स्कूल को नुकसान पहुंचाया। डिप्टी कमिश्नर रामबन ने कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं। जम्मू-श्रीनगर हाईवे भी लैंडस्लाइड से बंद हो गया है, जिससे सैकड़ों यात्री फंस गए।
जम्मू-कश्मीर में पिछले एक हफ्ते से भारी बारिश जारी है, जिससे नदियां उफान पर हैं और कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। रियासी और डोडा में ही 16 मौतें हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति की समीक्षा की और पीएम नरेंद्र मोदी से बात की। पीएम ने प्रभावितों के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक रियासी, रामबन, डोडा, कठुआ और उधमपुर में भारी बारिश की चेतावनी दी है। स्कूल-कॉलेज बंद हैं और लोग घरों में रहने को कहा गया है।
सरकार ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। प्रभावित परिवारों को भोजन, दवा और अस्थायी आश्रय दिया जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी आपदाएं बढ़ रही हैं, इसलिए बेहतर तैयारी जरूरी है।
