BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप में पीवी सिंधु का सफर हुआ खत्म, क्वार्टर फाइनल में इंडोनेशिया के खिलाड़ी से मिली मात
भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु का वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप 2025 में सफर क्वार्टर फाइनल में ही समाप्त हो गया। पेरिस के एडिडास एरिना में शुक्रवार को खेले गए महिला सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में 15वीं वरीयता प्राप्त सिंधु को इंडोनेशिया की कुसुमा वर्दानी के हाथों 14-21, 21-13, 16-21 से हार का सामना करना पड़ा। यह हार न केवल टूर्नामेंट से बाहर होने का दर्द दे गई, बल्कि सिंधु के लिए एक और ऐतिहासिक मेडल की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया। 2019 में इस चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीत चुकीं सिंधु अगर सेमीफाइनल तक पहुंच जातीं, तो झांग निंग के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेतीं।
मैच की शुरुआत सिंधु के लिए निराशाजनक रही। पहले गेम में इंडोनेशियाई शटलर कुसुमा ने आक्रामक खेल दिखाते हुए 21-14 से बढ़त हासिल कर ली। सिंधु ने दूसरे गेम में शानदार वापसी की और 21-13 से जीतकर मैच को निर्णायक गेम में ले गईं। लेकिन तीसरे गेम में 30 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी अपनी लय कायम नहीं रख सकीं और 16-21 से हार गईं। कुसुमा, जो विश्व रैंकिंग में नौवें स्थान पर हैं, ने इस साल 27 मैच जीते हैं और उनकी फॉर्म सिंधु के लिए बड़ी चुनौती साबित हुई। दोनों का पिछला मुकाबला सुदीरमन कप 2025 में हुआ था, जहां कुसुमा ने 21-12, 21-13 से जीत हासिल की थी।
सिंधु का इस टूर्नामेंट में सफर उम्मीदों के अनुरूप शुरू हुआ था। प्री-क्वार्टर फाइनल में उन्होंने विश्व नंबर-2 चीन की वांग झी यी को 21-19, 21-15 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी, जो 2021 के बाद उनकी पहली बार इस स्टेज पर पहुंचने वाली उपलब्धि थी। लेकिन क्वार्टर फाइनल में हार के साथ ही उनका अभियान थम गया। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता (रियो 2016- सिल्वर, टोक्यो 2021- ब्रॉन्ज) सिंधु अब 30 साल की उम्र में अपनी पुरानी चमक खोती नजर आ रही हैं। भारतीय प्रशंसकों की नजरें हमेशा उन पर रहती हैं, लेकिन समय के साथ उनका प्रदर्शन प्रभावित होता दिख रहा है।
इस साल 2025 सिंधु के लिए कुछ खास नहीं रहा। उन्होंने कुल 13 मैच हारे, जबकि केवल नौ में जीत हासिल की। पूरे वर्ष में वे सिर्फ दो टूर्नामेंट्स के क्वार्टर फाइनल तक पहुंच सकीं- जनवरी में इंडिया ओपन और अब वर्ल्ड चैंपियनशिप। इंडिया ओपन में भी उन्हें इंडोनेशिया की ग्रेगोरिया मारिस्का तुनजुंग के खिलाफ 9-21, 21-19, 17-21 से हार मिली थी। पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद से उनका फॉर्म लगातार उतार-चढ़ाव भरा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चोटों और उम्र के असर से सिंधु को अपनी रणनीति में बदलाव लाने की जरूरत है।
वहीं, भारतीय बैडमिंटन टीम के लिए कुछ सकारात्मक खबरें भी हैं। मिक्स्ड डबल्स में ध्रुव कपिला और तनिषा क्रैस्टो की जोड़ी ने क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है, जहां वे हॉन्ग कॉन्ग की जोड़ी को 19-21, 21-12, 21-15 से हराकर पहुंचे। पुरुष डबल्स में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी भी क्वार्टर फाइनल में हैं। लेकिन सिंधु की हार ने टीम इंडिया की मेडल उम्मीदों को झटका दिया है। भारत ने 2011 से हर वर्ल्ड चैंपियनशिप में कम से कम एक पदक जीता है, और अब अन्य खिलाड़ियों पर जिम्मेदारी है।
सिंधु ने मैच के बाद कहा, “मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया, लेकिन आज दिन उनका था। आगे के टूर्नामेंट्स में सुधार करूंगी।” बैडमिंटन फैन्स को उम्मीद है कि सिंधु जल्द ही पुरानी फॉर्म में लौटेंगी, लेकिन इस साल का जलवा तो यहीं थम गया।
