‘जेल जाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया होता तो…’ PM-CM से जुड़े नए बिल पर अमित शाह का बड़ा बयान
‘जेल जाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया होता तो…’ PM-CM से जुड़े नए बिल पर अमित शाह का बड़ा बयान
नई दिल्ली, 22 अगस्त 2025: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में पेश किए गए तीन नए विधेयकों को लेकर बड़ा बयान दिया है। इन विधेयकों में प्रावधान है कि यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री गंभीर आपराधिक मामले में 30 दिन से अधिक समय तक जेल में रहता है, तो उसे 31वें दिन पद छोड़ना होगा। इस बिल के पीछे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का मामला अहम माना जा रहा है। शाह ने कहा, “70 साल पहले एक ऐसी घटना हुई थी, जिसमें कई मंत्री और मुख्यमंत्री जेल गए थे और जेल जाने से पहले सबने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन हाल ही में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री जेल जाने के बाद भी सरकार चला रहे थे। अगर केजरीवाल ने जेल जाने के बाद इस्तीफा दे दिया होता, तो आज इस बिल की जरूरत ही नहीं पड़ती।”
शाह ने केरल में एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि यह बिल किसी खास पार्टी के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सभी पर लागू होगा, चाहे वह BJP का मुख्यमंत्री हो या प्रधानमंत्री। उन्होंने पूछा, “क्या देश की जनता चाहती है कि कोई मुख्यमंत्री जेल से सरकार चलाए? संविधान बनाते समय ऐसी निर्लज्जता की कल्पना नहीं की गई थी कि जेल जाने के बाद भी कोई इस्तीफा नहीं देगा।”
लोकसभा में बुधवार को पेश किए गए इन विधेयकों में *संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025*, *केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025*, और *जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025* शामिल हैं। बिल के अनुसार, यदि कोई नेता 5 साल या उससे अधिक सजा वाले अपराध में 30 दिन तक हिरासत में रहता है, तो उसे स्वतः पद छोड़ना होगा। जमानत मिलने के बाद दोबारा नियुक्ति संभव है।
विपक्ष ने इस बिल का कड़ा विरोध किया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इसे संविधान के खिलाफ बताया, जबकि AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और TMC सांसदों ने हंगामा किया। कुछ विपक्षी नेताओं ने बिल की प्रतियां फाड़ दीं। शाह ने जवाब में अपनी 2010 की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा, “मैंने नैतिकता के आधार पर गुजरात के गृहमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और कोर्ट से बरी होने तक कोई संवैधानिक पद नहीं लिया।”
शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया है, जहां पक्ष-विपक्ष की राय ली जाएगी। विपक्ष का आरोप है कि यह बिल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह सुशासन और नैतिकता को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है।
