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ढाका में सरकार के खिलाफ महारैली: महंगाई और बिजली संकट के बीच फिर गूंजे भारत विरोधी नारे

ढाका में सरकार के खिलाफ महारैली: महंगाई और बिजली संकट के बीच फिर गूंजे भारत विरोधी नारे

​ढाका: बांग्लादेश में बढ़ती महंगाई, बिजली संकट और ईंधन की भारी कमी को लेकर प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी (BNP) सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। शनिवार को ढाका स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) द्वारा आयोजित एक विशाल रैली में जहां एक ओर गृह और ऊर्जा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की गई, वहीं दूसरी ओर जनता का ध्यान भटकाने के लिए एक बार फिर भारत विरोधी नारेबाजी भी देखने को मिली।

​रैली की मुख्य बातें और विवादित बयान:

​”दिल्ली ना ढाका” के नारे: एनसीपी के संयोजक नाहिद इस्लाम के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में “दिल्ली ना ढाका” के नारे लगाए गए, जिसके जवाब में भीड़ ने “ढाका, ढाका” का शोर मचाया। इस रैली में विवादित एनसीपी सांसद हसनात अब्दुल्ला भी शामिल थे, जो पूर्व में भारत विरोधी धमकियों को लेकर चर्चा में रहे हैं।

​बिना सबूत के भड़काऊ दावे: 2024 के शेख हसीना तख्तापलट आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे नाहिद इस्लाम ने रैली में आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार बांग्लादेश को ‘भारतीय साजिशों’ से बचाने में विफल रही है। उन्होंने सीमा पर मौतों और भारत के आंतरिक मामलों को लेकर कई झूठे और बिना सबूत के दावे किए।

​गंगा जल समझौते पर अल्टीमेटम: नाहिद इस्लाम ने भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि का मुद्दा उठाते हुए चेतावनी दी कि यदि इसका निष्पक्ष नवीनीकरण नहीं हुआ, तो देश की जनता सड़कों पर उतरेगी।

​गंगा जल संधि (1996) का रणनीतिक महत्व:

​दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है संधि: भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में हस्ताक्षरित 30 वर्षीय ऐतिहासिक गंगा जल संधि इस वर्ष दिसंबर 2026 में समाप्त होने जा रही है।

​आजीविका से जुड़ा मुद्दा: पश्चिम बंगाल स्थित फरक्का बैराज से जनवरी से मई के शुष्क महीनों के दौरान पानी के बंटवारे से जुड़ी यह संधि बांग्लादेश (जहाँ नदी को ‘पद्मा’ कहा जाता है) की एक-तिहाई आबादी की आजीविका और कृषि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

​घरेलू संकट से ध्यान भटकाने की राजनीति:

​अगस्त 2024 में शेख हसीना के हटने और मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएं काफी तेजी से उभरी थीं। हालांकि, फरवरी 2026 में तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद कुछ समय तक इन बयानों में नरमी देखी गई थी। अब जब देश में आर्थिक मंदी, महंगाई और बिजली संकट के कारण सरकार के खिलाफ जनाक्रोश बढ़ रहा है, तो राजनीतिक दल एक बार फिर भारत विरोधी कार्ड खेलकर घरेलू समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।

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