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मिडटर्म चुनावों से पहले अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: नया ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू कर सकते हैं ट्रंप

मिडटर्म चुनावों से पहले अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: नया ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू कर सकते हैं ट्रंप

​वाशिंगटन: अमेरिका में आगामी 3 नवंबर को होने जा रहे मिडटर्म चुनावों (Midterm Elections) से ठीक पहले मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा एक बार फिर गहरा गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ एक बार फिर बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

​न्यूज वेबसाइट ‘एक्सियोस’ और ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि मिडटर्म चुनावों के बाद वाशिंगटन ईरान पर अपने सैन्य हमले तेज कर सकता है। हालांकि, व्हाइट हाउस के कुछ अधिकारियों का यह भी कहना है कि चुनाव परिणाम ईरान नीति पर ट्रंप के अंतिम फैसले को प्रभावित नहीं करेंगे।

​ट्रंप का बड़ा संकेत: छोटा ‘एपिक फ्यूरी’ संभव

​हाल ही में चुनावी रैलियों और इंटरव्यू के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ जारी यह संघर्ष जल्द ही एक नए और भीषण मोड़ पर पहुंच सकता है।

​ट्रंप का बयान: फ्लोरिडा की एक रैली में समर्थकों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, “हम एक और छोटा ‘एपिक फ्यूरी’ (Epic Fury) ऑपरेशन कर सकते हैं, या फिर वे (ईरान) खुद समझौते के लिए मान जाएंगे— अगर वे समझदार होंगे तो कहेंगे ‘चलिए काम की बात करते हैं।’ लेकिन मुझे शक है कि वे ऐसा करेंगे।”

​पृष्ठभूमि: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अमेरिका और इजरायल द्वारा इस साल फरवरी 2026 में ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया व्यापक सैन्य अभियान था।

​पेंटागन और CENTCOM प्रमुखों की व्हाइट हाउस में आपात ब्रीफिंग

​’द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की।

​सैन्य विकल्प पेश: शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ दोबारा बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने के विभिन्न विकल्प सौंपे।

​खाड़ी देशों को संदेश: अमेरिकी अधिकारियों ने अरब खाड़ी देशों के नेताओं को भी चुनावों के बाद एक छोटे लेकिन बेहद तीव्र सैन्य अभियान के लिए तैयार रहने की चेतावनी भेजी है।

​कूटनीतिक प्रयास: सैन्य तैयारियों के साथ-साथ उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) के जरिए बैकचैनल वार्ता का रास्ता भी तलाशा जा रहा है, हालांकि अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बनी है।

​47 अरब डॉलर का बोझ और गिरती अप्रूवल रेटिंग: घरेलू मोर्चे पर घिरे ट्रंप

​ईरान के साथ जारी यह युद्ध अमेरिका के घरेलू राजनीति और मिडटर्म चुनावों में एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है।

​भारी वित्तीय लागत: पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के शुरुआती 8 महीनों में ही अमेरिकी करदाताओं का 47.1 अरब डॉलर ($47.1 Billion) से अधिक पैसा खर्च हो चुका है।

​कमजोर जनसमर्थन: ‘हार्टफोर्ड कैप्स-हैरिस’ के हालिया सर्वे के अनुसार, केवल 35% पंजीकृत मतदाता ही ईरान युद्ध से निपटने के ट्रंप के तरीके का समर्थन करते हैं। बढ़ती तेल कीमतों और महंगाई के चलते यह युद्ध रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बन गया है।

​रणनीतिक लक्ष्य: वाशिंगटन का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और वैश्विक व्यापार व तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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