उत्तराखंड हेलीकॉप्टर हादसा: मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बीच उड़ान पर उठे सवाल
उत्तराखंड हेलीकॉप्टर हादसा: मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बीच उड़ान पर उठे सवाल, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
चमोली (उत्तराखंड): उत्तराखंड के चमोली जिले में हुए एक भीषण हेलीकॉप्टर हादसे के बाद सुरक्षा मानकों और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मौसम विभाग द्वारा पहले ही ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बावजूद हेली सेवा की अनुमति दिए जाने पर प्रशासनिक और तकनीकी कार्यप्रणाली कटघरे में है।
हादसे से जुड़े मुख्य बिंदु और विवाद:
मौसम विभाग का अलर्ट: आपदा कंट्रोल रूम के अनुसार, मौसम विभाग ने चमोली जिले में आकाशीय बिजली चमकने, ओलावृष्टि और 40-50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया था। इसके बावजूद देहरादून से बदरीनाथ और वापसी के लिए हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति मिल गई।
यूकाडा (UCADA) का पक्ष: उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) का कहना है कि जब हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी थी, तब मौसम साफ था। हालांकि, घाटी में अचानक मौसम खराब हुआ और महज 15 मिनट के भीतर ही कंट्रोल रूम से हेलीकॉप्टर का संपर्क टूट गया।
DGCA के नियमों पर सवाल: डीजीसीए (DGCA) की गाइडलाइन के अनुसार खराब मौसम में उड़ान की अनुमति नहीं होती है। प्रत्यक्षदर्शियों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को बदरीनाथ में सुबह से मौसम खराब था, और दोपहर में कुछ देर के लिए बादल छंटने पर उड़ान भरी गई थी। हालांकि, इसके बाद उड़ान भरने वाला दूसरा हेलीकॉप्टर सुरक्षित देहरादून पहुंच गया था।
रेस्क्यू ऑपरेशन और बरामदगी:
क्षतिग्रस्त शव बरामद: हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के शव सेना और बचाव दलों द्वारा बरामद कर लिए गए हैं।
ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) लाए जाएंगे शव: ज्योतिर्मठ के एसडीएम चंद्र शेखर वशिष्ठ के अनुसार, घटनास्थल एक दुर्गम वन क्षेत्र में है, जहाँ से सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, आईटीबीपी और स्थानीय प्रशासन की टीमें पैदल ही शवों को लेकर नीचे आ रही हैं। सभी शवों को शनिवार को ज्योतिर्मठ लाया जाएगा।
इस दुर्घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में चारधाम यात्रा और अन्य धार्मिक मार्गों पर संचालित होने वाली हेली सेवाओं के लिए मौसम संबंधी सुरक्षा प्रोटोकॉल की सख्ती पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

