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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन और खनिज नियंत्रण पर रिपोर्ट: सैन्य नीति और सुरक्षा संकट पर गहरी चिंता

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन और खनिज नियंत्रण पर रिपोर्ट: सैन्य नीति और सुरक्षा संकट पर गहरी चिंता

​इस्लामाबाद/काबुल: ‘ग्रीक सिटी टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की ‘हार्ड-स्टेट’ (कठोर राज्य) नीति इस अवधारणा पर आधारित है कि असंतोष या प्रतिरोध से निपटने का एकमात्र तरीका पर्याप्त बल का इस्तेमाल न होना है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत इस रणनीति की सबसे बड़ी और खतरनाक परीक्षा साबित हो सकता है।

​खैबर पख्तूनख्वा में संवैधानिक व्यवस्था और संघीय नियंत्रण:

​गवर्नर शासन और आपातकाल: रिपोर्ट के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तान की संघीय सरकार ने सैन्य प्रतिष्ठान के समर्थन से संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 का उपयोग करते हुए खैबर पख्तूनख्वा में आपातकालीन शक्तियां और गवर्नर शासन लागू कर दिया।

​चुनी हुई सरकार को हटाना: इस कदम के तहत मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी को ‘निवारक हिरासत’ (Preventive Detention) में ले लिया गया है और प्रांतीय विधानसभा को प्रभावी रूप से दरकिनार कर दिया गया है।

​खनिज संसाधनों पर कब्जा: पाकिस्तान के 18वें संवैधानिक संशोधन के तहत खनिज प्रांतीय अधिकार क्षेत्र का विषय हैं, लेकिन विधानसभा के न होने से वह कानूनी बाधा समाप्त हो गई है जो संघीय सरकार को प्रांत के खनिज संसाधनों पर नियंत्रण पाने से रोक रही थी। रिपोर्ट का अनुमान है कि सैन्य प्रतिष्ठान इन संसाधनों को अब पश्चिमी खरीदारों को बेचने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।

​बढ़ती हिंसा और सुरक्षा के मोर्चे पर चिंताजनक आंकड़े:

​रिपोर्ट में खैबर पख्तूनख्वा की विकट सुरक्षा स्थिति का जिक्र करते हुए कुछ प्रमुख आंकड़े साझा किए गए हैं:

​पुलिसकर्मियों की मौतें: वर्ष 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में पुलिसकर्मियों की मौतों का आंकड़ा बढ़कर 122 हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 63 था।

​हिंसा में वृद्धि: केवल जुलाई से सितंबर 2026 के बीच हिंसा से जुड़ी मौतों की संख्या 556 दर्ज की गई, जो पिछली तिमाही में 475 थी।

​अफगानिस्तान सीमा और विद्रोह: इस प्रांत में 4 करोड़ से अधिक की आबादी, मजबूत राजनीतिक गोलबंदी, अफगानिस्तान से लगी संवेदनशील सीमा और पूरे क्षेत्र में सक्रिय सशस्त्र विद्रोह के कारण स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

​बलूचिस्तान जैसे हालात पैदा होने की चेतावनी:

​इस्लामाबाद का तर्क है कि यह आपातकाल बिगड़ती सुरक्षा स्थिति से निपटने के लिए जरूरी था। हालांकि, रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है कि पश्तूनों के बीच लोकप्रिय रूप से वैध चुनी हुई सरकार को हटाना, मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करना और संसाधनों पर संघीय नियंत्रण थोपना हिंसा को रोकने के बजाय इसे और भड़काएगा।

​विश्लेषकों का मानना है कि इस नीति से उग्रवादी संगठनों को स्थानीय समर्थन जुटाने का एक बड़ा मुद्दा मिल जाएगा, जिससे खैबर पख्तूनख्वा में भी वही गंभीर प्रशासनिक और सामरिक संकट पैदा हो सकता है, जो पहले से ही बलूचिस्तान में बना हुआ है।

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