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इजरायल संसदीय चुनाव: एग्जिट पोल में त्रिशंकु संसद के आसार, 77.7% मतदान के साथ टूटा 27 साल का रिकॉर्ड

इजरायल संसदीय चुनाव: एग्जिट पोल में त्रिशंकु संसद के आसार, 77.7% मतदान के साथ टूटा 27 साल का रिकॉर्ड

​इजरायल की 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) के लिए हुए मतदान के बाद सामने आए एग्जिट पोल ने किसी भी राजनीतिक गुट को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिखाया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन और गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे—दोनों ही बहुमत के लिए आवश्यक 61 सीटों के जादुई आंकड़े से दूर नजर आ रहे हैं।

​सार्वजनिक प्रसारक ‘कान’ (Kan) और चैनल 13 के अद्यतन अनुमानों के अनुसार, देश में राजनीतिक गतिरोध और गठबंधन की लंबी खींचतान की संभावना बढ़ गई है।

​1. एग्जिट पोल के प्रमुख अनुमान (सीटों का गणित):

​बराबरी की टक्कर (51-51): ‘कान’ और ‘चैनल 13’ के एग्जिट पोल के अनुसार, नेतन्याहू गठबंधन और विपक्षी खेमे दोनों को 51-51 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है।

​लिकुड पार्टी सबसे आगे: व्यापक विरोध के बावजूद प्रधानमंत्री नेतन्याहू की ‘लिकुड पार्टी’ 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरती दिख रही है।

​गादी आइजेनकोट की ‘याशर’: पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट की ‘याशर’ (Yashar) पार्टी को 21 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।

​किंगमेकर बनीं इजरायली अरब पार्टियां: इस चुनाव में फिलिस्तीनी-अरब इजरायली दलों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 18 सीटों पर बढ़त का अनुमान दर्शाया है। किसी भी गुट के पास स्पष्ट बहुमत न होने की स्थिति में अगली सरकार के गठन के लिए ये दल निर्णायक साबित हो सकते हैं।

​2. 27 वर्षों में रिकॉर्ड 77.7% वोटिंग:

​इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा जारी अंतिम आंकड़ों के मुताबिक:

​ऐतिहासिक भागीदारी: मंगलवार रात 10 बजे मतदान समाप्त होने तक पात्र मतदाताओं में से 77.7% लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया।

​पिछला रिकॉर्ड टूटा: यह पिछले 27 वर्षों में दर्ज किया गया सर्वाधिक मतदान प्रतिशत है। यह 2022 के आम चुनावों की तुलना में 7% अधिक है।

​अरब मतदाताओं का उत्साह: इजरायली अरब समुदाय की रिकॉर्ड भागीदारी ने इस चुनाव के समीकरणों को बदलने में बेहद अहम भूमिका निभाई है।

​3. राजनीतिक परिदृश्य और आगे की राह:

​नेटन्याहू का मजबूत जनाधार: नतीजों के संकेत बताते हैं कि राजनीतिक विवादों के बावजूद नेतन्याहू का पारंपरिक दक्षिणपंथी वोट बैंक और लिकुड पार्टी के समर्थक पूरी तरह उनके साथ खड़े रहे।

​गठबंधन बनाने की चुनौती: हालांकि, लिकुड के सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद विपक्षी मोर्चे की संयुक्त ताकत और छोटी पार्टियों की अनिश्चित भूमिका के कारण नेतन्याहू के लिए सहयोगियों को जुटाकर 61 का आंकड़ा छूना बेहद कठिन चुनौती होगा।

​किंगमेकर की भूमिका में छोटी पार्टियां: अब सरकार का भविष्य चुनाव आयोग के अंतिम परिणाम, अंतिम वोटों की गिनती (सैनिकों व विशेष मतों) और सरकार बनाने की वार्ता में छोटी एवं अरब पार्टियों के रुख पर निर्भर करेगा।

 

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