उत्तराखंड

खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने विधानसभा सदस्यता से दिया इस्तीफा; ‘जन निर्माण पार्टी’ के साथ आगे बढ़ने का किया ऐलान

खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने विधानसभा सदस्यता से दिया इस्तीफा; ‘जन निर्माण पार्टी’ के साथ आगे बढ़ने का किया ऐलान

​उत्तराखंड की राजनीति से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है। खानपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक उमर कुमार ने विधानसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया है। गैरसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान उनके इस अचानक फैसले से प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

​अपने इस्तीफे के बाद उमेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी भविष्य की राजनीतिक रणनीति और योजनाओं का खुलकर खुलासा किया है।

​1. इस्तीफे के प्रमुख कारण और बयान:

​निर्दलीय से अलग राह: उमेश कुमार ने साफ कर दिया है कि वह न तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे और न ही कांग्रेस का दामन थामेंगे। वह आगामी विधानसभा चुनाव अपनी पार्टी ‘जन निर्माण पार्टी’ के सिंबल पर ही लड़ेंगे।

​विपक्ष पर अनदेखी का आरोप: अपने इस्तीफे के पीछे उन्होंने सदन में पिछले साढ़े चार साल के अपने अनुभवों को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि जब उन्होंने किसानों, आपदा पीड़ितों और बिजली-पानी जैसे बुनियादी जनहित के मुद्दे उठाए, तब उन्हें विपक्ष का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला और उन्हें अकेले ही संघर्ष करना पड़ा।

​हरीश रावत से पुरानी तल्खी का जिक्र: कांग्रेस नेताओं से मुलाकातों की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि साल 2016 से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत के साथ चली आ रही राजनीतिक तल्खी आज भी बरकरार है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं के खिलाफ उन्होंने संघर्ष किया और जिनकी सरकार को संकट में डाला, उनके साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता।

​2. विधानसभा अध्यक्ष और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:

​विधानसभा अध्यक्ष की पुष्टि: उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने पुष्टि की है कि उन्हें उमेश कुमार का इस्तीफा मिल गया है। पत्र को आगे की कानूनी और विधिवत प्रक्रिया के लिए विधानसभा सचिवालय भेज दिया गया है, जहां नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

​कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन की तीखी प्रतिक्रिया: इस इस्तीफे पर तीखा तंज कसते हुए पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने इसे “ड्रामा” करार दिया है। चैंपियन ने कहा कि जब विधानसभा कार्यकाल के केवल दो महीने ही शेष बचे हैं, तो ऐसे समय में इस्तीफे का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने युवाओं के रोजगार और विकास जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही।

​उमेश कुमार के इस कदम के बाद अब खानपुर सीट और प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों में एक नया मोड़ आ गया है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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