उत्तराखंड

गैरसैंण पेयजल सुरक्षा को ऐतिहासिक बढ़ावा: रामगंगा नदी पर 122.68 करोड़ रुपये की बांध निर्माण परियोजना को प्रशासनिक व वित्तीय मंजूरी

गैरसैंण पेयजल सुरक्षा को ऐतिहासिक बढ़ावा: रामगंगा नदी पर 122.68 करोड़ रुपये की बांध निर्माण परियोजना को प्रशासनिक व वित्तीय मंजूरी

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और जल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। चमोली जनपद के गैरसैंण नगर एवं आसपास की आबादी को भविष्य में निर्बाध और सुदृढ़ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए रामगंगा नदी पर बांध (डैम) निर्माण की महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

​1. परियोजना के वित्तीय पहलू और मुख्य बिंदु:

​कुल लागत: इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल अनुमानित लागत 122.68 करोड़ रुपये (₹122,68,91,000) तय की गई है।

​प्रथम किश्त जारी: चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत परियोजना के कार्यों को गति देने के लिए राज्य आकस्मिकता निधि से प्रथम किश्त के रूप में 2.45 करोड़ रुपये की टोकन धनराशि अग्रिम आहरित कर स्वीकृत की गई है।

​SASCI योजना का सहयोग: परियोजना के लिए आगे की वित्तीय व्यवस्था केंद्र सरकार की Scheme for Special Assistance to States for Capital Investment (SASCI) के अंतर्गत की जाएगी। स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च 2027 तक करना अनिवार्य होगा।

​2. गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी मानक:

​सरकार ने इस परियोजना के क्रियान्वयन में उच्च स्तरीय गुणवत्ता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं:

​तकनीकी जांच व SOP: बांध और बैराज के संरचनात्मक डिजाइन का सत्यापन किसी मान्यता प्राप्त संस्था से कराना अनिवार्य होगा। साथ ही, सिंचाई विभाग को इसके संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

​लैब परीक्षण और थर्ड-पार्टी ऑडिट: निर्माण सामग्री (रेत, सीमेंट, स्टील पाइप आदि) की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं से परीक्षण और तृतीय पक्ष गुणवत्ता परीक्षण (Third-Party Audit) कराना अनिवार्य किया गया है।

​पर्यावरण और स्थानीय हित: बांध निर्माण के दौरान और बाद में डाउनस्ट्रीम के गांवों में पानी की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने तथा स्थानीय पारिस्थितिकी का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।

​3. पारदर्शिता और जवाबदेही के कड़े नियम:

​सूचना पट्ट और डिजिटल रिकॉर्ड: कार्यस्थल पर योजना का नाम, लागत, प्रारंभ व पूर्ण होने की तिथि दर्शाने वाला सूचना पट्ट लगाना होगा। साथ ही, कार्य से पहले, दौरान और बाद की तस्वीरें व वीडियो सुरक्षित रखने तथा परियोजना को ‘पीएम गतिशक्ति पोर्टल’ पर अपलोड करना अनिवार्य है।

​वित्तीय अनुशासन: परियोजना में किसी भी तरह के अनधिकृत वित्तीय विचलन या पुनरीक्षण (Revision) की अनुमति नहीं होगी। स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में निर्मित स्थानीय सामग्री के उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी।

​निष्कर्ष:

​यह परियोजना गैरसैंण और उसके आसपास के क्षेत्रों की दीर्घकालिक पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बात पर जोर दिया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में आधारभूत विकास का कार्य पूरी तरह योजनाबद्ध, पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता के साथ होना चाहिए, ताकि उसका सीधा लाभ आम जनता तक पहुंचे।

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