अरशद मदनी का बड़ा बयान: ‘आज जो मस्जिदें शहीद की जा रही हैं, वे एक दिन फिर आबाद होंगी’, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
अरशद मदनी का बड़ा बयान: ‘आज जो मस्जिदें शहीद की जा रही हैं, वे एक दिन फिर आबाद होंगी’, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
मौलाना सैयद अरशद मदनी ने मस्जिदों और मुस्लिम धार्मिक संस्थानों को लेकर बयान देते हुए कहा है कि आज जिन मस्जिदों को शहीद किया जा रहा है, वे एक दिन फिर आबाद होंगी और वहां दोबारा ‘अल्लाहु अकबर’ की सदाएं गूंजेंगी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि सत्ता में बैठे लोग हमेशा नहीं रहते, सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन इस्लाम को मिटाने में कोई ताकत कामयाब नहीं हो सकी है।
मदनी ने अपने बयान में मौजूदा सरकार पर मुसलमानों के साथ-साथ इस्लाम, उनकी धार्मिक पहचान और धार्मिक संस्थानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकतों को सोवियत संघ के इतिहास से सबक लेना चाहिए। उनके मुताबिक, इस्लाम को मिटाने का सपना देखने वाले खुद इतिहास का हिस्सा बन गए, जबकि इस्लाम आज भी कायम है।
मदरसों के साथ माता-पिता की जिम्मेदारी पर भी दिया जोर
अरशद मदनी ने इस्लामी मदरसों को धर्म, ईमान और धार्मिक पहचान की रक्षा करने वाली संस्थाएं बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि नई पीढ़ी के ईमान, आस्था और नैतिक मूल्यों की रक्षा केवल मदरसों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें माता-पिता की भी अहम भूमिका है।
उन्होंने मुसलमानों से मौजूदा परिस्थितियों में निराश न होने की अपील करते हुए सब्र, एकता, समझदारी और दृढ़ता के साथ अपने धर्म पर कायम रहने का संदेश दिया।
क्या है जमीयत उलेमा-ए-हिंद?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद भारत के पुराने मुस्लिम संगठनों में से एक है। इसकी स्थापना वर्ष 1919 में हुई थी। संगठन धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहा है। वर्ष 2008 में संगठन दो गुटों में विभाजित हो गया था। मौलाना अरशद मदनी इसके एक गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
‘ओम और अल्लाह एक हैं’ बयान से भी हुआ था विवाद
अरशद मदनी अपने बयानों के कारण अक्सर राजनीतिक और धार्मिक चर्चाओं में रहते हैं। वर्ष 2023 में दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि मनु जिस ईश्वर की पूजा करते थे, वही अल्लाह हैं और ओम, ईश्वर, खुदा तथा अल्लाह एक ही सत्ता के अलग-अलग नाम हैं। उनके इस बयान पर जैन संतों सहित कई धार्मिक नेताओं ने आपत्ति जताई थी।
आरएसएस और हिंदुत्व की राजनीति की आलोचना
अरशद मदनी समय-समय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), हिंदुत्व की राजनीति और सांप्रदायिकता को लेकर भी अपनी राय रखते रहे हैं। वे सार्वजनिक बयानों में अल्पसंख्यकों के अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और मुसलमानों के साथ कथित भेदभाव के मुद्दे उठाते रहे हैं। उनके बयानों पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी होती रही है।
वर्ष 2026 में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘जिहाद’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर दिए गए उनके बयान पर भी चर्चा हुई थी। इस मुद्दे पर कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं सहित विभिन्न पक्षों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
मस्जिदों और मुस्लिम धार्मिक संस्थानों को लेकर अरशद मदनी का ताजा बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब धार्मिक स्थलों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे सार्वजनिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। उनके बयान में सरकार की आलोचना के साथ मुस्लिम समुदाय से एकजुट रहने और धार्मिक आस्था पर कायम रहने की अपील की गई है।

