राजनीति

शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के विलय का मामला: सुप्रीम कोर्ट में 8 दिसंबर को होगी अंतिम सुनवाई, स्पीकर पक्ष के अनुपस्थित रहने पर जताई नाराजगी

शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों के विलय का मामला: सुप्रीम कोर्ट में 8 दिसंबर को होगी अंतिम सुनवाई, स्पीकर पक्ष के अनुपस्थित रहने पर जताई नाराजगी

​शिवसेना के दो गुटों के बीच सांसदों की मान्यता और विलय को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल किए जाने के लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई के लिए 8 दिसंबर की तारीख तय की है।

​यह फैसला लोकसभा में दोनों गुटों के दलीय स्वरूप, व्हिप के अधिकार और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व की भावी दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

​1. अदालत की कार्यवाही और स्पीकर दफ्तर की अनुपस्थिति पर सवाल:

​पीठ की टिप्पणी: यह सुनवाई जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष हुई। पीठ ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि जुलाई में नोटिस जारी होने और उसकी विधिवत तामील होने के बावजूद लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) कार्यालय की ओर से कोई भी वकील या प्रतिनिधि अदालत में पेश नहीं हुआ।

​कपिल सिब्बल की दलीलें: याचिकाकर्ता और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद गणपत सावंत की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और देवदत्त कामत ने दलील दी कि जुलाई से नोटिस जारी होने के बाद भी विपक्षी पक्ष सुनवाई में शामिल नहीं हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर और कितने महीने जवाब का इंतजार किया जाएगा।

​अंतिम निपटारे की तारीख: नोटिस की तामील पूरी होने की पुष्टि के बाद शीर्ष अदालत ने मामले को और अधिक लटकाने के बजाय 8 दिसंबर को ‘अंतिम निस्तारण’ (Final Disposal) के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

​2. किन 6 सांसदों का है मामला?

​लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा शिवसेना (यूबीटी) के जिन 6 सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मंजूरी दी गई थी, वे हैं:

​संजय देशमुख

​संजय जाधव

​संजय दीना पाटिल

​नागेश पाटिल-आष्टिकर

​ओमप्रकाश राजेनिंबालकर

​भाऊसाहेब वाकचौरे

​3. राजनीतिक समीकरणों पर असर:

​संख्या बल में बदलाव: इन 6 सांसदों के शिंदे गुट के पक्ष में जाने से लोकसभा में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ताकत 7 सांसदों से बढ़कर 13 सांसद हो गई थी।

​यूबीटी की स्थिति: इस विलय की मान्यता के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) की सांसद संख्या सिमटकर महज 3 रह गई है।

​निष्कर्ष:

​अगस्त में भी स्पीकर पक्ष की ओर से किसी के उपस्थित न होने के कारण यह मामला टल गया था। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतिम सुनवाई की तारीख (8 दिसंबर) तय किए जाने से 10वीं अनुसूची (दलबदल कानून), संसदीय विलय और लोकसभा में उद्धव ठाकरे व शिंदे गुट की वास्तविक संख्या बल को लेकर कानूनी स्थिति पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है।

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