सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर को होगी रिलीज: वीडियो जारी कर कहा— “अब तक दूसरों ने कहानी बताई, अब मेरी बारी है; तमाशा होना तय”
सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर को होगी रिलीज: वीडियो जारी कर कहा— “अब तक दूसरों ने कहानी बताई, अब मेरी बारी है; तमाशा होना तय”
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी इन दिनों अपनी आगामी आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ को लेकर खासी चर्चा में हैं। अपनी इस बहुप्रतीक्षित किताब के प्रचार के लिए उन्होंने अपना नया इंस्टाग्राम अकाउंट भी लॉन्च किया है। किताब के रिलीज होने से पहले सोनिया गांधी ने एक वीडियो संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि जब यह किताब आएगी, तो “तमाशा होना तय है।”
यह पुस्तक आगामी 10 नवंबर 2026 को रिलीज होने जा रही है। आइए जानते हैं सोनिया गांधी के इस वीडियो और किताब से जुड़े मुख्य बिंदु:
1. “अब मेरी कहानी मैं खुद बताऊंगी”
वीडियो संदेश में सोनिया गांधी ने खुलकर बात करते हुए कहा कि अब तक उनके जीवन और राजनीतिक सफर के बारे में दूसरे लोगों ने लिखा और बताया है:
गलत और भ्रामक तथ्य: उन्होंने कहा कि उनके बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है, जिसमें से अधिकांश बातें गलत हैं—कुछ जानबूझकर गलत गढ़ी गईं और कुछ तथ्यों की कमी के कारण गलत हुईं।
खुद सामने रखेंगी सच: सोनिया गांधी ने कहा, “आखिर, इतने दशकों तक दूसरे लोग मेरी कहानी सुनाते रहे हैं, अब मेरी बारी है। अब मेरी कहानी मैं खुद बताऊंगी।”
विचारों में बदलाव की संभावना: उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि उनकी आत्मकथा पढ़ने के बाद शायद कुछ लोगों की उनके प्रति राय बदल जाए, या हो सकता है कुछ लोग उनके बारे में और अधिक नकारात्मक विचार बना लें, लेकिन एक लेखक के लिए यह स्वाभाविक प्रक्रिया है।
2. राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के खिलाफ थीं सोनिया:
इस वीडियो में सोनिया गांधी ने अपने जीवन के सबसे बड़े और दर्दनाक मोड़ का भी जिक्र किया है—जब उनकी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी। इसके तुरंत बाद कांग्रेस पार्टी ने राजीव गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाने का फैसला किया था। सोनिया गांधी ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि वे उस समय राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के पूरी तरह खिलाफ थीं।
3. राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व:
सवा तीन दशक का राजनीतिक सफर: सोनिया गांधी देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों (इन्दिरा-राजीव परिवार) की सदस्य रही हैं और कांग्रेस पार्टी की सबसे लंबे समय तक (लगभग दो दशक) अध्यक्ष पद संभालने वाली नेता हैं।
सत्ता की धुरी: यूपीए (UPA) शासनकाल के दौरान प्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री का पद न संभालने के बावजूद, वह सरकार और संगठन के भीतर सत्ता की मुख्य धुरी रहीं।
नए खुलासे की उम्मीद: देश की राजनीति के कई अहम उतार-चढ़ाव, अंदरूनी फैसलों और पारिवारिक पन्नों को एक नई दृष्टि से देखने के लिए राजनीतिक गलियारों और पाठकों में इस किताब को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है।

