अरुणाचल प्रदेश पर वायरल डीपफेक वीडियो को लेकर घमासान: सेना ने बताया फर्जी, कांग्रेस भाजपा आमने सामने; राष्ट्रीय सुरक्षा पर छिड़ी सियासी बहस
अरुणाचल प्रदेश पर वायरल डीपफेक वीडियो को लेकर घमासान: सेना ने बताया फर्जी, कांग्रेस भाजपा आमने सामने; राष्ट्रीय सुरक्षा पर छिड़ी सियासी बहस
अरुणाचल प्रदेश के संवेदनशील इलाकों (असाफिला, लोंगजू और ताकसिंग सर्किल) पर चीन के कब्जे और भारतीय सेना को आपूर्ति न मिलने के दावे वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इस वायरल वीडियो में ये तमाम बातें सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल गिरिश कालिया के हवाले से कही गई थीं।
अब इस मामले में भारतीय सेना के कड़े फैक्ट चेक और खंडन के बाद यह विवाद केवल एक फर्जी वीडियो तक सीमित न रहकर गंभीर राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस में बदल गया है।
1. भारतीय सेना का स्पष्टीकरण और फैक्ट चेक:
डीपफेक और सिंथेटिक तकनीक का इस्तेमाल: भारतीय सेना ने आधिकारिक रूप से सामने आकर इस वीडियो को फर्जी, डॉक्टर्ड और डीपफेक करार दिया है। सेना ने साफ किया कि वीडियो में सुनाई देने वाले बयान पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठे हैं।
असली वीडियो का सच: जांच में यह खुलासा हुआ कि वायरल वीडियो की मूल फुटेज 27 अक्टूबर 2023 की है, जब मेजर जनरल गिरिश कालिया ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में एक प्रेस ब्रीफिंग की थी। उस दौरान एलओसी (LoC) पर घुसपैठ और आतंकवाद विरोधी अभियानों पर जानकारी दी गई थी, जिसमें अरुणाचल प्रदेश या चीन से जुड़े किसी भी दावे का दूर-दूर तक जिक्र नहीं था।
सेना की अपील: सेना ने स्पष्ट किया कि पुराने वीडियो पर AI और सिंथेटिक तकनीक के जरिए नकली आवाज और भ्रामक नैरेटिव तैयार किया गया है। सेना ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे भ्रामक वीडियो बिना जांचे-परखे साझा न करें।
2. वीडियो शेयर करने पर राजनीतिक घमासान:
कांग्रेस नेताओं की भूमिका: इस भ्रामक वीडियो को सबसे पहले बिहार कांग्रेस की प्रवक्ता रितु चौधरी द्वारा साझा किया गया था, जिसके बाद यह तेजी से फैल गया।
असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का कड़ा रुख: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि फर्जी वीडियो के जरिए भारतीय सेना और देश की छवि को धूमिल करने की सुनियोजित कोशिश की गई है। उन्होंने इस मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
3. NSUI अध्यक्ष का बयान और नया राजनीतिक मोड़:
विवाद तब और बढ़ गया जब NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भले ही वीडियो डॉक्टर्ड (छेड़छाड़ किया हुआ) हो, लेकिन उसमें उठाए गए जमीनी मुद्दे और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं गलत नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बाहरी सुरक्षा के मुद्दों पर गंभीर नहीं है।
उनके इस बयान के बाद यह बहस वीडियो की प्रामाणिकता से आगे निकलकर सीधे तौर पर केंद्र सरकार की नीतियों, चीन के साथ सीमाई स्थिति और विपक्ष की भूमिका पर आमने-सामने के राजनीतिक टकराव में बदल गई है।

