अमेरिकी चुनावों से ठीक पहले मेटा पर कसा शिकंजा: एंटी-ट्रंप संगठन ‘नो किंग्स कोएलिशन’ का इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड होने पर अटॉर्नी जनरल्स और सीनेटरों ने पूछे तीखे सवाल
अमेरिकी चुनावों से ठीक पहले मेटा पर कसा शिकंजा: एंटी-ट्रंप संगठन ‘नो किंग्स कोएलिशन’ का इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड होने पर अटॉर्नी जनरल्स और सीनेटरों ने पूछे तीखे सवाल
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले कांग्रेस चुनावों (Midterm/Congressional Elections) से ठीक पहले टेक दिग्गज मेटा (Meta) भारी राजनीतिक दबाव में घिर गई है। मामला एंटी-ट्रंप संगठन ‘नो किंग्स कोएलिशन’ (No Kings Coalition) के इंस्टाग्राम अकाउंट को अस्थायी रूप से निलंबित (Suspended) किए जाने से जुड़ा है, जिसने सोशल मीडिया पर राजनीतिक अभिव्यक्ति और निष्पक्षता को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
1. अटॉर्नी जनरल्स और सीनेटरों की सख्त पूछताछ:
14 राज्यों के अटॉर्नी जनरल्स का शिकंजा: सोमवार को कनेक्टिकट के अटॉर्नी जनरल विलियम टोंग के नेतृत्व में कैलिफोर्निया, मैरीलैंड, न्यूयॉर्क, मैसाचुसेट्स और वॉशिंगटन समेत 14 राज्यों के अटॉर्नी जनरल्स ने मेटा को एक पत्र भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने पूछा कि 17 अक्टूबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान इस संगठन का अकाउंट क्यों बंद किया गया और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
डेमोक्रेटिक सीनेटरों का पत्र: इससे पहले 22 अक्टूबर को पांच डेमोक्रेटिक सीनेटरों (क्रिस वैन होलेन, रॉन वायडन, जेफ मर्कली, रिचर्ड ब्लूमेंथल और क्रिस मर्फी) ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को पत्र लिखकर कंपनी की स्वचालित कंटेंट मॉडरेशन (Automated Content Moderation) प्रणाली पर सवाल उठाए थे।
2. क्या था पूरा मामला और मेटा की सफाई?
सस्पेंशन और व्यवधान: ‘नो किंग्स कोएलिशन’ के अनुसार, 17 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:30 बजे (ईस्टर्न टाइम) उनका इंस्टाग्राम अकाउंट अचानक बंद कर दिया गया, जबकि उसी समय पूरे देश में राजनीतिक रैलियां और प्रदर्शन चल रहे थे। करीब 90 मिनट बाद अकाउंट पब्लिक तो हुआ, लेकिन लॉगिन करने में चार घंटे से अधिक का समय लगा। इस दौरान संगठन अग्रिम मतदान (Early Voting) से जुड़ा अपना संदेश समर्थकों तक नहीं पहुंचा सका।
मेटा की दलील: मेटा ने स्वीकार किया है कि यह अकाउंट निलंबन एक ‘तकनीकी गलती’ थी। कंपनी के मुताबिक, अकाउंट पर अचानक बहुत अधिक ट्रैफिक और गतिविधियां बढ़ गई थीं, जिसे उसके ऑटोमेटेड सिस्टम ने संदिग्ध बॉट्स (बॉटकॉल) या स्वचालित गतिविधि समझ लिया था।
सरकारी जांच के बिंदु: अटॉर्नी जनरल्स ने 29 अक्टूबर (चुनाव से ठीक 5 दिन पहले) तक मेटा से जवाब मांगा है। उन्होंने यह भी जांच की मांग की है कि क्या इस प्रक्रिया में ह्यूमन रिव्यूअर्स (मानव समीक्षकों) की कोई भूमिका थी और क्या चुनाव से जुड़े अन्य वैध राजनीतिक अकाउंट भी इससे प्रभावित हुए हैं।
3. ऑटोमेटेड सिस्टम बनाम राजनीतिक अभियान:
यह विवाद इस बात पर रोशनी डालता है कि कैसे बड़ी टेक कंपनियां स्पैम और फर्जी गतिविधियों को रोकने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम का सहारा लेती हैं।
हालांकि, राजनीतिक रैलियों, विरोध प्रदर्शनों और चुनावी अभियानों के दौरान समर्थकों द्वारा अचानक संदेश साझा करने और समन्वय करने से ट्रैफिक में भारी उछाल आता है। इस घटना ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि क्या एआई और ऑटोमेटेड फिल्टर वैध राजनीतिक गतिविधियों और खतरनाक बॉट गतिविधियों में सही अंतर कर पाने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। (जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि इस कार्रवाई के पीछे किसी प्रशासन का सीधा दबाव या निर्देश था।)

