होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने पर ईरान का बड़ा प्रस्ताव: अमेरिका के समक्ष रखी शर्त, ट्रंप ने ठुकराया
होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने पर ईरान का बड़ा प्रस्ताव: अमेरिका के समक्ष रखी शर्त, ट्रंप ने ठुकराया
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के सबसे संवेदनशील जलमार्ग ‘होर्मुज़ स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान ने अमेरिका के सामने एक कूटनीतिक प्रस्ताव रखा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में जानकारी दी कि यदि अमेरिका जून में तय किए गए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) की शर्तों को पूरा करता है, तो ईरान महज एक हफ्ते (सात दिन) के भीतर इस जलमार्ग को पुनः खोलने के लिए तैयार है। यह प्रस्ताव कतर के माध्यम से अमेरिकी प्रशासन तक पहुंचाया गया है।
प्रस्ताव और 14 सूत्रीय समझौते की मुख्य बातें:
शर्तें और नौसैनिक नाकाबंदी: ईरान की शर्तों के अनुसार, अमेरिका को होर्मुज़ और आसपास के जलक्षेत्र से अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटानी होगी, तेहरान पर लगे आर्थिक व तेल प्रतिबंधों में ढील देनी होगी तथा लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को रोकना होगा।
परमाणु प्रतिबद्धता: समझौते के तहत ईरान यह प्रतिबद्धता जताता है कि वह परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा और गंभीर बातचीत के लिए तैयार है।
चीन का समर्थन: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा इस समझौते पर लौटने के आग्रह की सराहना की है। पेजेश्कियन ने कहा है कि तेहरान बातचीत और कूटनीति का समर्थन करता है, लेकिन वह धमकियों की भाषा स्वीकार नहीं करेगा।
डोनाल्ड ट्रम्प का रुख और प्रस्ताव खारिज:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस सात-दिवसीय प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को तेहरान की मंशा पर भरोसा नहीं है और उनका कहना है कि वह ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। इसके साथ ही, ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक नक्शा भी शेयर किया जिसमें होर्मुज़ स्ट्रेट को ‘ट्रंप स्ट्रेट’ के रूप में दर्शाया गया है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि:
अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमलों के बाद से यह संघर्ष शुरू हुआ था। दोनों देशों के बीच जून में 14 सूत्रीय समझौता हुआ था, जिसे जुलाई में ट्रंप द्वारा ‘खत्म’ घोषित किए जाने के बाद ईरान ने भी निलंबित कर दिया था। अब एक बार फिर इस संवेदनशील जलमार्ग को खोलने को लेकर diplomatic हलचल तेज हो गई है, हालांकि अमेरिका के मौजूदा रुख से तनाव बरकरार है।
