NPCI का स्पष्टीकरण: यूपीआई पर एमडीआर और जीएसटी को लेकर मीडिया रिपोर्टों का खंडन, 2,000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन रहेंगे पूरी तरह मुफ्त
NPCI का स्पष्टीकरण: यूपीआई पर एमडीआर और जीएसटी को लेकर मीडिया रिपोर्टों का खंडन, 2,000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन रहेंगे पूरी तरह मुफ्त
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि यूपीआई (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) और उस पर लगने वाला जीएसटी छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा और डिजिटल भुगतान को महंगा कर देगा। एनपीसीआई ने साफ किया है कि यह दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
एनपीसीआई के स्पष्टीकरण के मुख्य बिंदु
2,000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन पर शून्य एमडीआर: एमडीआर केवल 2,000 रुपए से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। 2,000 रुपए तक के सभी यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर पहले की तरह शून्य एमडीआर रहेगा और इन पर जीएसटी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
96% से अधिक ट्रांजैक्शन अप्रभावित: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2,000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन कुल यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 96 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं। इसका मतलब है कि अधिकांश यूपीआई भुगतान एमडीआर और उससे जुड़े किसी भी जीएसटी दायित्व से पूरी तरह मुक्त हैं।
छोटे व्यापारियों को राहत: जिन व्यापारियों की मासिक यूपीआई प्राप्तियां 1 लाख रुपए तक हैं, उन्हें एमडीआर का भुगतान नहीं करना होगा। इसलिए छोटे व्यापारियों पर किसी भी तरह के अतिरिक्त वित्तीय बोझ का सवाल ही नहीं उठता।
जीएसटी समायोजन (इनपुट टैक्स क्रेडिट): एनपीसीआई ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यापारी द्वारा एमडीआर पर जीएसटी का भुगतान किया जाता है, तो इसे अन्य इनपुट टैक्स की तरह उसकी जीएसटी देनदारी के विरुद्ध समायोजित (Adjust) किया जा सकता है। यह राशि अंततः व्यापारी पर अतिरिक्त लागत के रूप में नहीं पड़ती।
व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान पूरी तरह मुफ्त: एनपीसीआई और वित्त मंत्रालय ने दोहराया है कि सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यूपीआई ट्रांजैक्शन राशि चाहे कितनी भी हो, पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
एमडीआर और शुल्क से जुड़े नए नियम
एमडीआर दर: नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपए से अधिक के पी2एम ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। हालांकि, 75,000 रुपए या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपए प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।
आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्र: रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपए से अधिक के ट्रांजैक्शन पर केवल 5 रुपए प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट एमडीआर लागू होगा, ताकि इन सेक्टरों में लागत सीमित और पूर्वानुमेय बनी रहे।
एमडीआर क्या है? वित्त मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि एमडीआर कोई कर (Tax) नहीं है और न ही यह सरकार या एनपीसीआई द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क है। यह राशि बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और यूपीआई ऐप प्रदाताओं जैसे भागीदारों के बीच नेटवर्क के संचालन और विस्तार के लिए वितरित की जाती है।
कुल मिलाकर, एनपीसीआई का कहना है कि एमडीआर को लेकर फैलाई जा रही आशंकाओं का दायरा बहुत सीमित है, क्योंकि देश के 96% से अधिक यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन और अधिकांश छोटे कारोबारी इस बदलाव से पूरी तरह सुरक्षित हैं।
