छत्तीसगढ़ के बस्तर में पीएम मोदी का बड़ा बयान: बोले— “हथियारबंद नक्सली खत्म, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सलियों’ से देश को खतरा”
छत्तीसगढ़ के बस्तर में पीएम मोदी का बड़ा बयान: बोले— “हथियारबंद नक्सली खत्म, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सलियों’ से देश को खतरा”
बस्तर/नई दिल्ली:
छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ देश की निर्णायक लड़ाई, सुरक्षा बलों के बलिदान और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा की। पीएम मोदी ने कहा कि देश के जंगलों से हथियारबंद नक्सली अब लगभग समाप्त हो चुके हैं, लेकिन वर्तमान में देश के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
”दिमागी नक्सलियों” से निपटने की चेतावनी
प्रधानमंत्री ने देश को आगाह करते हुए कहा कि आज कुछ “दिमागी नक्सलियों” ने कई राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों में घुसपैठ कर ली है। ये लोग आज भी आम जनता को देश के संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ भड़काने और उकसाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बल देकर कहा कि अब ऐसे लोगों की पहचान करना, उन्हें तलाशना और देश को सुरक्षित करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
नक्सलवाद का काला दौर और ऐतिहासिक बदलाव
वामपंथी उग्रवाद के पुराने इतिहास को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह लड़ाई कतई आसान नहीं थी:
व्यापक प्रभाव: एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले (बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, यूपी, एमपी और छत्तीसगढ़ सहित) नक्सलवाद की चपेट में थे। साल में दो-दो हजार तक नक्सली हमले होते थे और शाम होते ही जनजीवन ठप हो जाता था।
दर्दनाक हादसे: वर्ष 2010 में दंतेवाड़ा में हुई नक्सली हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे और उसी जिले में 44 निर्दोष नागरिकों की भी हत्या कर दी गई थी। अकेले छत्तीसगढ़ में एक हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई थी।
राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत: प्रधानमंत्री ने कहा कि 2004 से 2013 के बीच हर साल शहीद होने वाले जवानों की संख्या मारे गए नक्सलियों से अधिक थी, लेकिन 2014 के बाद मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ कार्रवाई शुरू हुई। परिणामस्वरूप, पिछले एक साल में 47 वर्षों में पहली बार ऐसा ऐतिहासिक पल आया जब ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ।
विकास, गरीबी उन्मूलन और बुनियादी ढांचा
नक्सलवाद के खात्मे के साथ-साथ सरकार द्वारा उन क्षेत्रों में किए गए विकास कार्यों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उग्रवादियों का मुख्य एजेंडा विकास रोकना था:
बुनियादी ढांचे का विस्तार: सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ इन इलाकों में 1,500 किमी से अधिक सड़कें बनाई गईं, 9,500 से ज्यादा मोबाइल टावर लगाए गए और लगभग 200 एकलव्य स्कूल खोले गए। युवाओं के लिए 50 आईटीआई व कौशल विकास केंद्र शुरू किए गए।
जनमन योजना और बैंक: हजारों डाकघर, बैंक शाखाएं और एटीएम खोले गए। ‘प्रधानमंत्री जनमन योजना’ के जरिए दूरदराज के गांवों तक पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गईं।
गरीबी के खिलाफ जंग: विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पीएम ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत में 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर निकले हैं, और इस सफलता का एक बड़ा आधार नक्सलवाद व अलगाववाद के खिलाफ लड़ी गई निर्णायक लड़ाई भी है।

