उत्तराखंड

छोटी दिवाली की आतिशबाजी से बिगड़ी उत्तराखंड की आबोहवा: देहरादून में AQI 290 पहुंचा, मैदानी व पहाड़ी शहरों में बढ़ा प्रदूषण

छोटी दिवाली की आतिशबाजी से बिगड़ी उत्तराखंड की आबोहवा: देहरादून में AQI 290 पहुंचा, मैदानी व पहाड़ी शहरों में बढ़ा प्रदूषण

​देहरादून:

​दीपावली के अवसर पर हुई आतिशबाजी का बुरा असर उत्तराखंड के शहरों की वायु गुणवत्ता पर साफ दिखने लगा है। छोटी दिवाली की रात देर तक चले पटाखों के धुएं और धुंध के कारण राजधानी देहरादून में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 290 तक पहुंच गया, जो बेहद ‘खराब’ श्रेणी में आता है। चिंता की बात यह है कि मैदानी जिलों के साथ-साथ अब राज्य के पहाड़ी शहरों में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है।

​शहरों में वायु गुणवत्ता (AQI) के आंकड़े

​उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार छोटी दिवाली पर प्रमुख शहरों में प्रदूषण की स्थिति:

​देहरादून: AQI 290 (खराब श्रेणी)

​रुड़की: AQI 152

​ऋषिकेश: AQI 150

​काशीपुर: AQI 140

​हल्द्वानी: AQI 115

​नैनीताल: AQI 74

​टिहरी: AQI 51

​आंकड़ों से स्पष्ट है कि मैदानी क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर है, लेकिन नैनीताल और टिहरी जैसे पहाड़ी इलाकों में भी हवा का प्रभावित होना पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय है।

​सर्दियों में क्यों गहरा रहा प्रदूषण संकट?

​पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में हवा की रफ्तार धीमी होने और तापमान गिरने के कारण धूल व धुएं के सूक्ष्म कण हवा में निचली सतह पर जमा हो जाते हैं:

​घाटी प्रभाव: पहाड़ी घाटियों में हवा का प्रवाह सीमित रहने से पटाखों का धुआं, वाहनों का उत्सर्जन और निर्माण कार्य से निकलने वाली धूल लंबे समय तक वातावरण में बनी रहती है।

​बड़ी दिवाली पर और बिगड़ सकते हैं हालात: यह आंकड़े छोटी दिवाली के हैं। मुख्य दीपावली पर भारी आतिशबाजी के कारण आने वाले दिनों में हवा का स्तर और अधिक बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

​प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अपील

​उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव पराग मधुकर ने बताया कि बोर्ड द्वारा शहरों में पर्यावरण सुधार के प्रयास जारी हैं और लोगों को पटाखों के प्रति सतर्क रहने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। विशेषज्ञों ने सर्दियों के मौसम में वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी और कड़े कदम उठाने की जरूरत बताई है।

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