पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 3,300 के पार: PPCB की रिपोर्ट में खुलासा, ₹60 लाख से अधिक जुर्माना और 870 FIR दर्ज
पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 3,300 के पार: PPCB की रिपोर्ट में खुलासा, ₹60 लाख से अधिक जुर्माना और 870 FIR दर्ज
चंडीगढ़/पटियाला:
पंजाब में पराली (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की सख्त कार्रवाई के बावजूद राज्य भर में आग लगाने के हजारों मामले सामने आए हैं। PPCB द्वारा जारी 7 नवंबर 2026 तक की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अब तक पराली जलाने की कुल 3,307 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
राज्यव्यापी कार्रवाई और पर्यावरण मुआवजा
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय प्रशासन द्वारा जमीनी स्तर पर व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है:
निरीक्षण और पुष्टि: कुल दर्ज 3,307 मामलों में से 2,903 खेतों का मौके पर निरीक्षण किया गया, जिनमें से 1,275 स्थानों पर पराली जलाने की प्रत्यक्ष पुष्टि हुई है।
जुर्माना और वसूली: पराली जलाने के मामलों में पर्यावरण मुआवजे (EC) के तहत कुल ₹60.60 लाख का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से ₹32.50 लाख की वसूली की जा चुकी है।
कानूनी कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन करने पर 870 मामलों में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है, 1,004 मामलों में जमीन के रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ की गई है और 1,102 मामलों में चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं।
तरनतारन शीर्ष पर, जिलों की स्थिति
राज्य में पराली जलाने के मामलों में तरनतारन जिला सबसे आगे है। प्रमुख जिलों के आंकड़े निम्नलिखित हैं:
तरनतारन: 623 मामले (राज्य में सर्वाधिक)
फिरोजपुर: 435 मामले
संगरूर: 294 मामले
बठिंडा: 274 मामले
अमृतसर: 235 मामले
पटियाला जिले की रिपोर्ट
पटियाला जिले में अब तक पराली जलाने की 196 घटनाएं दर्ज की गई हैं:
जांच और जुर्माना: 157 स्थानों के निरीक्षण के दौरान 94 खेतों में आग लगाने की पुष्टि हुई। जिले में 68 मामलों में पर्यावरण मुआवजे के तहत ₹3.45 लाख का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से ₹1.25 लाख की वसूली की जा चुकी है।
कार्रवाई: पटियाला में 77 एफआईआर दर्ज की गई हैं, 33 मामलों में रेड एंट्री की गई है और 185 चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं।
प्रशासनिक सख्ती के बावजूद 7 नवंबर 2026 तक के ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य के कई जिलों में फसल अवशेष जलाने पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

