परिवर्तिनी एकादशी: आज रखा जा रहा है व्रत, जानें पूजा विधि, महत्व और नियम
परिवर्तिनी एकादशी: आज रखा जा रहा है व्रत, जानें पूजा विधि, महत्व और नियम
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह व्रत 22 सितंबर को रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में इस एकादशी को पार्श्व एकादशी और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
भगवान विष्णु का करवट बदलना: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान क्षीरसागर में योगनिद्रा में विराजमान भगवान विष्णु इसी दिन अपनी करवट बदलते हैं, जिसके कारण इसे ‘परिवर्तिनी एकादशी’ कहा जाता है।
पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति: मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि एवं भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पूजा विधि और अनुष्ठान
स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
पूजन सामग्री: भगवान विष्णु को जल, पंचामृत, पीले फूल, चंदन, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें।
मंत्र जाप और भोग: धूप-दीप जलाकर ‘नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। भगवान को पीले फल या सात्विक मिष्ठान का भोग लगाएं। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
संध्या वंदन: शाम के समय भगवान विष्णु की आरती करें और तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाएं।
व्रत के नियम और पारण
आहार: श्रद्धालु अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार निर्जल, फलाहार या सात्विक आहार (दूध, फल और मेवे) के साथ व्रत रख सकते हैं।
पारण: एकादशी व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी तिथि में किया जाता है। इस दिन इंद्रियों पर नियंत्रण, संयम और सात्विक आचरण पर विशेष जोर दिया जाता है।
(नोट: इस आलेख में दी गई जानकारियां पारंपरिक मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित हैं।)
