जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र का हंगामेदार आगाज: पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग और पक्ष-विपक्ष में तीखी नोकझोंक
जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र का हंगामेदार आगाज: पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग और पक्ष-विपक्ष में तीखी नोकझोंक
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सात दिवसीय ऑटम (शरद) सत्र की शुरुआत बेहद हंगामेदार और नाटकीय माहौल में हुई। सदन के पहले ही दिन पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के तेवर आमने-सामने नजर आए। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदगी में सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी दलों के बीच तीखी तनातनी हुई।
सत्र के पहले दिन के मुख्य घटनाक्रम
पूर्ण राज्य के दर्जे की जोरदार मांग: कार्यवाही शुरू होते ही सत्ताधारी गठबंधन (नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और माकपा) के सदस्यों ने अपनी सीटों से खड़े होकर जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे को तत्काल बहाल करने की पुरजोर मांग उठाई। इस दौरान सदन में जमकर नारेबाजी भी हुई।
बीजेपी का सरकार पर हमला: विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने हाथों में तख्तियां लेकर कामकाज, रोजगार, बिजली और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों पर सरकार को घेरा। भाजपा ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार का वास्तविक जनहित और विकास कार्यों पर कोई फोकस नहीं है।
पक्ष और विपक्ष में टकराव: हंगामे के बीच वेल में आकर प्रदर्शन कर रहे भाजपा विधायकों और सत्ता पक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक व धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। हालात को संभालते हुए विधानसभा स्पीकर ने सदस्यों को अपनी सीटों पर लौटने की चेतावनी दी।
नेताओं की प्रतिक्रियाएं
डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी का बयान: विपक्ष के हंगामे और आरोपों पर पलटवार करते हुए उप मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा करने और जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष सुनना ही नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि इससे साफ होता है कि वे जन-कल्याण के कार्यों के प्रति गंभीर नहीं हैं।
नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा का रुख: वहीं, बीजेपी विधायक और नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता की उम्मीदें और अपेक्षाएं इस सत्र से जुड़ी हैं। विपक्ष होने के नाते उन तमाम वर्गों की आवाज उठाना उनका कर्तव्य है जिन्हें नजरअंदाज किया गया है।
सात दिनों तक चलेगा सत्र
यह सत्र कुल सात दिनों (विभिन्न बैठकों) तक चलेगा, जिसमें सरकार के विधायी कार्यों के साथ-साथ कई अहम मुद्दों और जनहित से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा होनी है। भले ही सत्र की अवधि छोटी है, लेकिन पहले ही दिन के तेवरों को देखते हुए यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में बेरोजगारी, विकास और प्रशासनिक मुद्दों पर सदन की कार्यवाही काफी गर्म रहने वाली है।
