राजनीति

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुआ पोस्टर वार: सपा शासनकाल के कथित माफियाओं के नाम चर्चा में

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुआ पोस्टर वार: सपा शासनकाल के कथित माफियाओं के नाम चर्चा में

​उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच सियासी गलियारों में ‘पोस्टर वार’ तेज हो गया है। राज्य के विभिन्न चौक-चौराहों और क्षेत्रों में ऐसे कई पोस्टर सामने आए हैं, जिन पर इन्हें लगवाने वाले का नाम तो दर्ज नहीं है, लेकिन उनके निशाने पर सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के शासनकाल के दौरान चर्चा में रहे कथित माफिया और बाहुबली हैं।

​अवध से लेकर पूर्वांचल तक पोस्टरों में किनके नाम?

​क्षेत्रवार जारी किए गए इन पोस्टरों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों (अवध, रुहेलखंड, ब्रज, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी) से जुड़े कई कुख्यात और चर्चित चेहरों को शामिल किया गया है। इन पोस्टरों में कुछ पुराने अखबारों की कटिंग और खबरों का भी इस्तेमाल किया गया है:

​अवध क्षेत्र: इस क्षेत्र के पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, आज़म खान, गुलशन यादव, मित्रसेन यादव और रिजवान जहीर के नाम शामिल हैं। इसके अलावा रेप के आरोपी नवाब सिंह (जिसे अखिलेश का करीबी बताया गया है), दीपनारायण यादव और आगजनी मामले में दोषी इरफान सोलंकी का भी जिक्र है।

​रुहेलखंड क्षेत्र: यहां वीरपाल सिंह यादव, आज़म खान और सर्वेश यादव के नाम पोस्टरों में दिखाए गए हैं।

​ब्रज क्षेत्र: इस हिस्से के पोस्टरों में नवाब सिंह यादव, राम वृक्ष यादव, रामेश्वर सिंह यादव और जोगेश्वर यादव के नाम दर्ज हैं।

​बुंदेलखंड क्षेत्र: इस क्षेत्र से इरफान सोलंकी, दीप नारायण सिंह यादव, आज़म खान, मुख्तार अंसारी और चंद्रपाल सिंह यादव के नाम चर्चा में हैं।

​पूर्वांचल क्षेत्र: पूर्वांचल के पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, उमाकांत यादव, रमाकांत यादव और मुन्ना बजरंगी जैसे नाम शामिल हैं। साथ ही आजमगढ़ जहरीली शराब कांड के संदर्भ में रमाकांत यादव का जिक्र है।

​पश्चिमी यूपी: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पोस्टरों में आज़म खान, याकूब कुरैशी, अनिल दुजाना, डीपी यादव, संजीव जीवा और कैराना पलायन मामले से जुड़े मुकीम काला गिरोह का नाम शामिल है। पोस्टरों में संजीव जीवा द्वारा 1997 में पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या का भी उल्लेख किया गया है।

​सीधे तौर पर निशाने पर सपा नेतृत्व

​इन अनाम पोस्टरों के जरिए मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर निशाना साधा जा रहा है। पोस्टरों में पुराने आपराधिक मामलों, अखबारों की सुर्खियों (जैसे लैंड क्रूजर में बैठकर अपहरण की खबरें) और विभिन्न मुकदमों के जरिए राजनीतिक माहौल गरमाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल इस पोस्टर वार को लेकर राजनीतिक दलों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *