रूस से तेल-गैस खरीद पर अमेरिकी कानून का प्रस्ताव, चीन ने जताई कड़ी आपत्ति
रूस से तेल-गैस खरीद पर अमेरिकी कानून का प्रस्ताव, चीन ने जताई कड़ी आपत्ति
रूस से तेल और गैस की खरीद पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने वाले अमेरिकी कानून ‘सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ को लेकर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी कांग्रेस के इस कदम की आलोचना करते हुए चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस तरह के एकतरफा कानूनों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और चीन इनका कड़ा विरोध करता है।
चीनी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि देश अन्य राष्ट्रों के साथ समानता और आपसी लाभ के आधार पर सामान्य आर्थिक व व्यापारिक संबंध रखता है। यह सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है और इसमें किसी भी प्रकार का बाहरी दबाव या रुकावट स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
क्या है इस अमेरिकी विधेयक में?
इस प्रस्तावित विधेयक के तहत रूसी उत्पादों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, रूस से तेल और गैस का आयात करने वाले देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लगाया जा सकता है।
सीनेटर केटी ब्रिट के कार्यालय के मुताबिक, उन देशों को इस कानून से छूट दी जा सकती है, जिनकी ओर से रूस से आयात की जाने वाली प्राकृतिक गैस, रूस के कुल गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम है और जो अपनी खरीद में कटौती के लिए गंभीर प्रयास कर रहे हैं।
कानून का मुख्य उद्देश्य
इस सख्त कानून का उद्देश्य यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए रूस को मिलने वाले आर्थिक संसाधनों को कमजोर करना है। इसके दायरे में रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं और रूसी सैन्य अभियानों का समर्थन करने वाली विदेशी संस्थाओं को लाया गया है।
ये प्रावधान मुख्य रूप से उन बड़े देशों पर लागू होंगे जो रूस से भारी मात्रा में ऊर्जा का आयात करते हैं या रूसी तेल प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद करते हैं। समिति के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में इसकी समीक्षा करेंगे और जरूरत के हिसाब से अन्य देशों को भी इस सूची में जोड़ा जा सकता है।
