Friday, September 18, 2026
Latest:
राष्ट्रीय

निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की आत्महत्या, पिछले साल ही सुप्रीम कोर्ट से हुआ था बरी

निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की आत्महत्या, पिछले साल ही सुप्रीम कोर्ट से हुआ था बरी

​चर्चित निठारी कांड में बच्चों की हत्या और दुष्कर्म के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। जानकारी के मुताबिक, बरी होने के बाद वह पिछले कुछ समय से हरिद्वार में ही रहकर चाय बेचने का काम कर रहा था। बीते साल नवंबर में ही सुप्रीम कोर्ट ने उसे इस कुख्यात मामले से बरी किया था, जिसके बाद उसके खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक मामले खत्म हो गए थे।

​क्या था बहुचर्चित निठारी कांड?

वर्ष 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी इलाके में यह सनसनीखेज मामला सामने आया था, जब कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी (D-5 मकान) के पीछे एक नाले और खुले इलाके से 19 महिलाओं और बच्चों के कंकाल व हड्डियां बरामद हुई थीं। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

​जांच के दौरान पुलिस ने कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को 29 दिसंबर 2006 को हिरासत में लिया था, जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी। पुलिस और जांच एजेंसियों ने दावा किया था कि बच्चियों और महिलाओं के साथ क्रूरता की गई, उनके शवों के टुकड़े किए गए और कोली ने पुलिस के सामने यह जुर्म कबूला भी था। हालांकि, लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कोली के उस दावे को स्वीकार कर लिया कि उसने पुलिस के दबाव में जुर्म स्वीकार किया था।

​20 साल चली कानूनी लड़ाई और बरी होने का सिलसिला

लगभग दो दशक तक चले इस कानूनी संघर्ष का अंत अभियुक्तों की रिहाई के साथ हुआ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2023 में सुरेंद्र कोली को 12 मामलों में बरी कर दिया था। इसके बाद, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी लंबित मामले में भी उसकी सजा रद्द कर दी और उसे बरी कर दिया। सह-आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर को भी अदालत ने पहले ही बरी कर दिया था।

​अल्मोड़ा से दिल्ली और फिर निठारी तक का सफर

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मंगलू खाल गांव के रहने वाले सुरेंद्र कोली का शुरुआती जीवन बेहद गरीबी में बीता। आर्थिक तंगी के कारण उसकी पढ़ाई ज्यादा नहीं हो पाई और उसने स्कूल छोड़ दिया था। रोजगार की तलाश में वह दिल्ली-एनसीआर आया और मजदूरी करने लगा। वर्ष 2004 में महज 20 साल की उम्र में वह निठारी में मोनिंदर सिंह पंढेर के घर घरेलू नौकर के तौर पर काम करने लगा था, जहां से उसकी जिंदगी एक खौफनाक और विवादित मोड़ पर पहुंच गई थी। जेल से रिहाई के बाद वह गुमनाम जिंदगी जी रहा था और हरिद्वार में चाय की दुकान चला रहा था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *