Friday, September 18, 2026
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NIA की बड़ी कार्रवाई: 7 साल पुराने मानव तस्करी मामले में हैदराबाद कोर्ट का फैसला, 8 बांग्लादेशियों समेत 9 दोषियों को उम्रकैद

NIA की बड़ी कार्रवाई: 7 साल पुराने मानव तस्करी मामले में हैदराबाद कोर्ट का फैसला, 8 बांग्लादेशियों समेत 9 दोषियों को उम्रकैद

​राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को मानव तस्करी से जुड़े एक मामले में बड़ी सफलता हाथ लगी है। हैदराबाद की विशेष NIA अदालत ने वर्ष 2019 के मानव तस्करी गिरोह से जुड़े 9 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में सजा पाने वालों में 8 बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं। अदालत ने 17 सितंबर को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इसके साथ ही सभी दोषियों पर कुल 1.37 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न चुकाने पर 3 महीने अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

​क्या था पूरा मामला?

यह पूरा मामला साल 2019 का है, जब एक खतरनाक मानव तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ था। यह गिरोह बांग्लादेशी महिलाओं को बेहतर नौकरी और ऊंची तनख्वाह का लालच देकर अवैध रूप से भारत लाता था और इसके बाद उन्हें जबरन देह व्यापार (प्रॉस्टिट्यूशन) के दलदल में धकेल देता था।

​इस मामले की शुरुआत सितंबर 2019 में हुई थी, जब तेलंगाना पुलिस ने हैदराबाद के पहाड़ी शरीफ थाने में केस दर्ज किया था। पुलिस ने एक खुफिया कार्रवाई के दौरान जलपल्ली गांव के एक वेश्यालय से 3 बांग्लादेशी महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाला था। इसके अलावा, हैदराबाद के बालापुर स्थित महिमूद कॉलोनी के एक अन्य घर से एक और महिला को रेस्क्यू किया गया था।

​एनआईए ने कब संभाली कमान?

तेलंगाना पुलिस की शुरुआती कार्रवाई के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए NIA ने 12 अक्टूबर 2019 को जांच अपने हाथ में ले ली और इसे नया केस दर्ज किया। कड़े साक्ष्य जुटाने के बाद एजेंसी ने 17 अक्टूबर 2020 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। NIA ने पश्चिम बंगाल और तेलंगाना समेत देश के विभिन्न हिस्सों से छापेमारी कर आरोपियों को 2019 और 2020 के दौरान गिरफ्तार किया था।

​दोषियों के नाम:

अदालत द्वारा सजा पाने वाले 9 आरोपियों में रुहुल अमीन धाली, मोहम्मद यूसुफ खान उर्फ मोहम्मद इमरान, बिथी बेगम उर्फ खादिजा शेख, इमामुल गाजी उर्फ मोहम्मद राणा हुसैन, मोहम्मद अल मामून, सोजिब शेख, सुरेश कुमार दास उर्फ सागर, मोहम्मद अब्दुल्ला मुंशी उर्फ अब्दुल सरकार और मोहम्मद अयूब शेख शामिल हैं। इन सभी पर आईपीसी (IPC), फॉरेनर्स एक्ट 1946 और इम्मोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट 1956 की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया था।

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