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मराठा आरक्षण आंदोलन: मनोज जरांगे पाटिल ने 20 दिन की भूख हड़ताल की स्थगित, सरकार को दिया 90 दिन का अल्टीमेटम

मराठा आरक्षण आंदोलन: मनोज जरांगे पाटिल ने 20 दिन की भूख हड़ताल की स्थगित, सरकार को दिया 90 दिन का अल्टीमेटम

​मराठा आरक्षण की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने आखिरकार अपनी भूख हड़ताल स्थगित करने का ऐलान कर दिया है। सरकार के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई सकारात्मक बातचीत के बाद उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी भूख हड़ताल सिर्फ स्थगित हुई है, लेकिन आंदोलन अभी जारी रहेगा और सरकार को 90 दिनों का समय दिया गया है।

​सरकार और प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत:

​जरांगे पाटिल को मनाने और उनकी मांगों पर चर्चा के लिए पहुंचे सरकारी प्रतिनिधिमंडल में कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और दादाजी भुसे, विधायक प्रसाद लाड और सुरेश धस तथा बीड के जिलाधिकारी शामिल थे।

​मंत्री विखे पाटिल का पक्ष: बैठक के दौरान मंत्री विखे पाटिल ने बताया कि सातारा गजट में 1,100 पन्नों की लंबी रिपोर्ट है, जिसका बारीकी से अध्ययन करने में करीब तीन से चार महीने का समय लगेगा। वहीं, हैदराबाद गजट के जीआर के मामले में जो विषय अभी अदालत (कोर्ट) में लंबित है, उस पर कोई कानूनी रोक न लगे, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।

​भाजपा विधायक प्रसाद लाड का बयान: विधायक प्रसाद लाड ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के विशेष अनुरोध पर जरांगे पाटिल ने अपनी 20 दिन की लंबी भूख हड़ताल समाप्त की है। सरकार ने अगले 90 दिनों के भीतर सभी वादों को पूरा करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई है।

​मनोज जरांगे पाटिल की मुख्य मांगें और चेतावनी:

​गजट लागू करने की मांग: जरांगे पाटिल ने मांग की है कि तीन महीने के भीतर सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी करके सातारा, कोल्हापुर, पुणे और औंध गजट को लागू किया जाए। उन्होंने हाल ही में जारी एक अन्य जीआर का हवाला देते हुए मांग की कि जिस तरह ‘हिंदू वाणी’ और ‘वैश्य वाणी’ को एक बताया गया है, उसी तर्ज पर सरकार जीआर जारी कर स्पष्ट करे कि “मराठा और कुनबी एक ही हैं”।

​58 लाख कुणबी रिकॉर्ड: उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि शिंदे समिति द्वारा खोजे गए 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड से किसी भी तरह की छेड़छाड़ या कटौती नहीं की जानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर उन्होंने रिकॉर्ड खोजने में मदद के लिए समाज के लोग उपलब्ध कराने की भी पेशकश की।

​रद्द प्रमाणपत्रों की बहाली: मराठवाड़ा के चार जनप्रतिनिधियों के रद्द किए गए कुणबी प्रमाणपत्रों को तुरंत फिर से वैध करने की विशेष मांग उठाई गई है।

​सरकार को चेतावनी: जरांगे पाटिल ने साफ शब्दों में चेताया कि यदि सरकार ने उनके साथ धोखा करने या केवल ‘समय खरीदने’ की कोशिश की, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और मजबूर होकर मुंबई कूच करेंगे। उन्होंने सीएम देवेंद्र फडणवीस से यह भी आग्रह किया कि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस या वीडियो संदेश के जरिए सार्वजनिक रूप से इन प्रमुख बिंदुओं पर अपनी बात रखें।

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