ऑस्ट्रेलियाई सरकार का बड़ा कदम: इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए वीजा नियम सख्त, परिवार को साथ लाने पर लग सकती है रोक
ऑस्ट्रेलियाई सरकार का बड़ा कदम: इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए वीजा नियम सख्त, परिवार को साथ लाने पर लग सकती है रोक
विदेशों में पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों और विशेषकर ऑस्ट्रेलिया जाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। बढ़ती आबादी और प्रवासन (Migration) को नियंत्रित करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों (International Students) के लिए वीजा नियमों को और अधिक सख्त करने की योजना बनाई है।
नए नियमों और बदलावों से जुड़ी मुख्य बातें:
परिवार को साथ लाने पर रोक: नए प्रस्तावित नियमों के तहत विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई के दौरान अपने पति-पत्नी (पार्टनर) और बच्चों को अपने साथ ऑस्ट्रेलिया लाने के रास्ते बेहद सीमित या बंद किए जाने की योजना है। हालांकि, प्रशांत द्वीप समूह और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ चुनिंदा देशों के छात्रों को इस नियम से थोड़ी राहत मिल सकती है।
प्रवासन को घटाने का लक्ष्य: ऑस्ट्रेलिया में पिछले कुछ वर्षों में नेट माइग्रेशन तेजी से बढ़ा था, जो साल 2023 में बढ़कर करीब 5.18 लाख तक पहुंच गया था (जो जून 2025 तक घटकर लगभग 3.06 लाख रह गया)। सरकार का लक्ष्य है कि नेट माइग्रेशन को मौजूदा 3 लाख के स्तर से घटाकर 2028 तक लगभग 2.25 लाख प्रति वर्ष किया जाए।
वीजा फीस और अन्य सख्त शर्तें: परिवार को साथ लाने पर रोक के अलावा, सरकार ने अंग्रेजी भाषा की दक्षता, वित्तीय क्षमता (Financial Capacity) से जुड़े नियमों को कड़ा कर दिया है। इसके साथ ही पिछले चार सालों में छात्र वीजा फीस में करीब 300% की भारी बढ़ोतरी की गई है। वर्किंग हॉलीडे वीजा के लिए बैलेट सिस्टम और विजिटर वीजा धारकों के देश के भीतर दूसरे वीजा में बदलने पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं।
ऑस्ट्रेलिया में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के आंकड़े (शीर्ष 5 देश):
मई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में कुल 6,80,582 इंटरनेशनल स्टूडेंट्स दर्ज किए गए हैं, जिनमें भारत और चीन की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है:
क्रम देश छात्रों की संख्या हिस्सेदारी (%)
1. चीन 1,59,860 लगभग 23%
2. भारत 1,10,662 लगभग 16%
3. नेपाल 60,732 लगभग 9%
4. वियतनाम 31,064 लगभग 5%
5. बांग्लादेश 27,831 लगभग 4%
इन पांच देशों से मिलकर कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों की लगभग आधी हिस्सेदारी बनती है। चूंकि भारत इस सूची में दूसरे स्थान पर है, इसलिए इन नए नियमों का असर बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ सकता है।
