रूस से ऊर्जा आयात पर दबाव: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने पारित किया प्रतिबंध बिल, राष्ट्रपति को मिल सकता है 100% टैरिफ का अधिकार
रूस से ऊर्जा आयात पर दबाव: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने पारित किया प्रतिबंध बिल, राष्ट्रपति को मिल सकता है 100% टैरिफ का अधिकार
रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाने की अमेरिकी रणनीति के तहत अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाला एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिया है। इस नए विधेयक के कानून बनने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा खरीदार देश इस प्रस्ताव के दायरे में आ सकते हैं, हालांकि फिलहाल भारत पर कोई नया टैरिफ लागू नहीं किया गया है।
विधेयक और प्रतिबंध से जुड़े मुख्य बिंदु:
प्रतिनिधि सभा की मंजूरी: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को रूस के अधिकारियों, वित्तीय संस्थाओं और आर्थिक क्षेत्रों को निशाना बनाने वाले इस प्रतिबंध पैकेज को 262 के मुकाबले 159 मतों से पारित कर दिया। सीनेट इसे पहले ही 7 अगस्त को भारी बहुमत से पास कर चुकी है।
ईरान प्रतिबंधों का विस्तार: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांग के अनुरूप इसमें ईरान पर लागू प्रतिबंधों को 5 वर्ष तक बढ़ाने का प्रावधान भी जोड़ा गया है, जिसके बाद इसे अंतिम समर्थन मिला।
रूस की ‘शैडो फ्लीट’ निशाने पर: इस विधेयक में रूस के राजनीतिक नेतृत्व और बैंकिंग सेक्टर के अलावा उन जहाजों (शैडो फ्लीट) को भी निशाना बनाया गया है, जिनका इस्तेमाल पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करके रूसी तेल और ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति के लिए किया जाता है।
भारत पर इसका क्या असर हो सकता है?
अधिकार मिलना, न कि स्वतः टैरिफ: इस बिल का सबसे बड़ा प्रावधान राष्ट्रपति को रूस से ऊर्जा (तेल और गैस) खरीदने वाले शीर्ष आयातक देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की शक्ति देना है। चूंकि भारत और चीन रूस के सबसे बड़े ऊर्जा खरीदार हैं, इसलिए वे संभावित रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
राष्ट्रपति का निर्णय: स्पष्ट किया गया है कि बिल पास होने का मतलब भारत पर तुरंत टैरिफ लगना नहीं है। शुल्क लगाना या न लगाना पूरी तरह अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रशासन के विवेक पर निर्भर करेगा।
अब आगे क्या?
प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलने के बाद अब इस विधेयक को अंतिम स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा। उनके हस्ताक्षर के बाद यह आधिकारिक रूप से कानून का रूप ले लेगा, जिससे अमेरिकी प्रशासन के पास रूस से व्यापार करने वाले देशों के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने की नई शक्तियां आ जाएंगी।
