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एन्थ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई की चेतावनी: AI विकास की रफ्तार तुरंत धीमी करने की मांग, महज 6 महीनों में इंटरनेट पर कब्जे का अंदेशा

एन्थ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई की चेतावनी: AI विकास की रफ्तार तुरंत धीमी करने की मांग, महज 6 महीनों में इंटरनेट पर कब्जे का अंदेशा

​आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एन्थ्रोपिक (Anthropic) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डारियो अमोदेई ने एआई विकास की मौजूदा रफ्तार को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो इसके परिणाम बहुत घातक हो सकते हैं, और आने वाले मात्र छह महीनों में एआई एजेंटों के झुंड इंटरनेट पर अपना नियंत्रण स्थापित कर सकते हैं।

​1. एआई के सकारात्मक पहलुओं पर विश्वास, लेकिन जोखिमों से इनकार नहीं

​मानव जीवन के लिए वरदान: डारियो अमोदेई का कहना है कि उन्होंने पिछले 12 वर्षों से एआई क्षेत्र में इसलिए काम किया है क्योंकि उनका मानना है कि यह तकनीक मानव जीवन की गुणवत्ता को अभूतपूर्व तरीके से सुधार सकती है।

​बीमारियों का इलाज: उनका यह भी मानना है कि आने वाले 5 से 10 वर्षों के भीतर एआई की मदद से दुनिया की अधिकांश प्रमुख बीमारियों का प्रभावी इलाज ढूंढा जा सकता है।

​2. क्षमताओं के विकास की गति को धीमा करने की जरूरत

​सावधानी बरतने की आवश्यकता: अमोदेई ने स्वीकार किया है कि अन्य तकनीकों की तरह एआई भी अपने साथ बड़े जोखिम लेकर आती है। उन्होंने कहा कि हालिया महीनों में उन्हें यह महसूस हुआ है कि इन जोखिमों से निपटने के लिए केवल सुरक्षा उपायों में निवेश काफी नहीं है, बल्कि क्षमताओं के विकास की गति को भी नियंत्रित करना होगा।

​समय का बुद्धिमानी से उपयोग: उनका सुझाव है कि मॉडल की क्षमताओं में सुधार की रफ्तार को थोड़ा धीमा किया जाना चाहिए ताकि सुरक्षा और जोखिम निवारण प्रणालियों को उसके साथ तालमेल बिठाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

​3. 2023 और आज की परिस्थितियों में अंतर

​बदलते खतरे और एआई की शक्ति: अमोदेई के अनुसार, साल 2023 के दौरान एआई को रोकने या धीमा करने की जो चर्चाएं उठी थीं, वे उस समय उतनी तर्कसंगत नहीं लगी थीं क्योंकि तब तकनीक इतनी विकसित नहीं थी।

​धोखाधड़ी और साइबर हमलों का खतरा: उस वक्त एआई मॉडल इतने शक्तिशाली नहीं थे कि वे दुनिया में किसी प्रकार के छल, हेरफेर, वित्तीय धोखाधड़ी या बड़े पैमाने पर साइबर हमलों को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभा सकें, लेकिन अब हालात तेजी से बदल चुके हैं।

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