वांण गांव में नंदा देवी बड़ी जात को लेकर नया विवाद, डीएम ने समिति को चेतावनी दी
थराली/चमोली (अपडेट): सिद्धपीठ कुरूड़ से नंदा देवी की तीन डोलियां कैलाश यात्रा के लिए रवाना होने के चार दिन बाद भी बड़ी जात यात्रा को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। यात्रा मार्ग के अंतिम गांव वांण में श्रद्धालुओं के पहुंचने से संभावित अव्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर नई तकरार शुरू हो गई है।
क्या है विवाद?
वांण गांव की ग्राम प्रधान नंदुली देवी ने जिलाधिकारी चमोली को पत्र लिखकर शिकायत की है। इसमें कहा गया है कि बड़ी जात के दौरान मां राजराजेश्वरी की डोली के साथ अन्य डोलियां और बड़ी संख्या में श्रद्धालु वांण पहुंचने से गांव में अव्यवस्था और अशांति उत्पन्न हो सकती है।
इस पत्र के आधार पर जिलाधिकारी गौरव कुमार ने नायब तहसीलदार नंदानगर (घाट) के माध्यम से बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत को चेतावनी पत्र जारी किया। डीएम ने समिति को ग्राम प्रधान और ग्रामीणों से विचार-विमर्श कर आपसी सहमति से मामला सुलझाने को कहा। साथ ही चेतावनी दी कि यात्रा के दौरान शांति और कानून व्यवस्था प्रभावित होने पर संबंधित लोगों का उत्तरदायित्व तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
समिति का जवाब
समिति अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने प्रशासन को तीन पेज का जवाबी पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि बड़ी जात का आयोजन महीनों पहले सिद्धपीठ कुरूड़ के पुजारियों, डोली और मंदिर समिति की सहमति से विधिवत तय किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि गौड़ पुजारियों का एक गुट (जो राजजात समिति नौटी से भी जुड़ा है) यात्रा में अवरोध उत्पन्न करने का प्रयास कर रहा है। इसे सोची-समझी कार्ययोजना बताते हुए उन्होंने मामले की जांच की मांग की।
समिति ने स्पष्ट किया कि वांण गांव में नंदा देवी के धर्मभाई लाटू देवता का पौराणिक मंदिर स्थित है, जो श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में वांण में प्रवेश को लेकर रोक या आपत्ति धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। कानून व्यवस्था बनाए रखने और यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं (पेयजल, स्वास्थ्य, सुरक्षा, विश्राम स्थल आदि) उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की है।
समिति ने कहा कि वह प्रशासन के साथ विचार-विमर्श और समन्वय के लिए तैयार है और यात्रा मार्ग के दुर्गम व निर्जन पड़ावों पर समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं जुटाने की मांग की है।
प्रशासन का रुख
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि बड़ी जात यात्रा के सभी प्रमुख पड़ावों पर मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस टीम और नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं। प्रशासन कानून और शांति व्यवस्था पर लगातार नजर रखे हुए है। उन्होंने साफ किया कि यात्रा के दौरान किसी भी हाल में शांति भंग नहीं होने दी जाएगी।
पृष्ठभूमि
नंदा देवी बड़ी जात (जिसे हिमालयी महाकुंभ भी कहा जाता है) 12 साल बाद 5 सितंबर 2026 को सिद्धपीठ कुरूड़ से शुरू हुई है। यह लगभग 280 किमी लंबी पैदल यात्रा है, जो होमकुंड में समाप्त होगी। इससे पहले नौटी स्थित राजजात समिति ने 2026 की राजजात को 2027 में स्थगित कर दिया था, जबकि कुरूड़ पक्ष ने इसी साल बड़ी जात निकालने का फैसला लिया। दोनों पक्षों में नाम और आयोजन को लेकर पहले से मतभेद चल रहे थे।
यात्रा आगे बढ़ चुकी है। अब देखना यह है कि वांण समेत अन्य पड़ावों पर प्रशासन और समिति के बीच समन्वय कैसे बनता है और श्रद्धालुओं को सुविधाएं कैसे उपलब्ध कराई जाती हैं।
