हल्द्वानी बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली: 17 सितंबर को अगली सुनवाई संभव; पुलिस का कड़ा पहरा और 4,300 परिवारों के पुनर्वास की तैयारी
हल्द्वानी बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली: 17 सितंबर को अगली सुनवाई संभव; पुलिस का कड़ा पहरा और 4,300 परिवारों के पुनर्वास की तैयारी
हल्द्वानी/नई दिल्ली: हल्द्वानी के चर्चित बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई टल गई है। करीब 50 हजार निवासियों (4,300 से अधिक प्रभावित परिवारों) के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले की सुनवाई टलने से स्थानीय लोगों को फिलहाल अंतरिम राहत मिली है। कानूनी सूत्रों के अनुसार, यह मामला अब 17 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में लिस्ट हो सकता है।
1. बनभूलपुरा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ड्रोन से निगरानी
अलर्ट मोड पर नैनीताल पुलिस: सुनवाई के मद्देनजर बनभूलपुरा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी और एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्र ने सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली।
ड्रोन और सोशल मीडिया पर नजर: क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई। इसके साथ ही छतों पर ईंट, पत्थर या मलबा जमा करने वालों और सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
2. 4,300 परिवारों के लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत पुनर्वास
30 हेक्टेयर भूमि पर पुनर्वास: सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन ने मार्च महीने से ही प्रभावितों के पुनर्वास की प्रक्रिया को गति दी है।
पीएम आवास योजना कैंप: करीब 30 हेक्टेयर भूमि पर 4,300 से अधिक प्रभावित परिवारों को ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY) का लाभ देने के लिए जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं।
3. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का सपा और कांग्रेस पर हमला
वोट बैंक की राजनीति का आरोप: हल्द्वानी में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनभूलपुरा अतिक्रमण के लिए सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।
सीएम का बयान: धामी ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती विपक्षी दलों ने अपने वोट बैंक को साधने के लिए सरकारी रेलवे भूमि पर अवैध अतिक्रमण को बढ़ावा दिया और लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।
