Wednesday, September 9, 2026
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इजरायल का ब्रिटेन पर बड़ा कूटनीतिक प्रहार: पूर्वी यरुशलम स्थित ब्रिटिश कांसुलेट बंद करने का आदेश; ब्रिटिश सांसदों के प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध

इजरायल का ब्रिटेन पर बड़ा कूटनीतिक प्रहार: पूर्वी यरुशलम स्थित ब्रिटिश कांसुलेट बंद करने का आदेश; ब्रिटिश सांसदों के प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध

​यरुशलम/लंदन: इजरायल और ब्रिटेन के बीच जारी कूटनीतिक तनातनी चरम पर पहुँच गई है। वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों के उत्पादों पर ब्रिटेन द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और ब्रिटिश मंत्री एड मिलिबैंड के कड़े बयानों से नाराज इजरायल ने ब्रिटेन के खिलाफ कई कड़े जवाबी कदमों की घोषणा की है। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने पूर्वी यरुशलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास (Consulate) को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है।

​1. इजरायल द्वारा घोषित 4 प्रमुख प्रतिबंध और कड़े कदम

​पूर्वी यरुशलम कांसुलेट बंद: यरुशलम के शेख जर्राह इलाके में स्थित ब्रिटिश दूतावास (जो मुख्य रूप से गाजा, वेस्ट बैंक और फिलीस्तीनी मामलों को देखता था) का कामकाज रोकने का आदेश दिया गया है। तेल अवीव स्थित ब्रिटेन का मुख्य दूतावास पहले की तरह काम करता रहेगा।

​ब्रिटिश सांसदों के प्रवेश पर बैन: इजरायल ने ब्रिटेन के कई प्रमुख वामपंथी और ग्रीन पार्टी के सांसदों के इजरायल में प्रवेश पर रोक लगा दी है। इनमें जेरेमी कॉर्बिन, जारा सुल्ताना, डायने एबॉट, नाज शाह, जॉन मैकडॉनेल, रिचर्ड बर्गोन, हन्ना स्पेंसर, कार्ला डेनेयर, सियान बेरी और एली चोन्स शामिल हैं।

​सैन्य प्रशिक्षण सुरक्षा समझौता समाप्त: वेस्ट बैंक में फिलीस्तीनी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देने में ब्रिटेन की लंबे समय से चली आ रही भूमिका को इजरायल ने समाप्त कर दिया है।

​गाजा समन्वय मिशन से बाहर: ब्रिटेन को इजरायल स्थित अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘गाजा समन्वय मिशन’ (Gaza Coordination Mission) से निष्कासित कर दिया गया है।

​2. इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार का बयान

​यरुशलम की संप्रभुता: विदेश मंत्री सार ने कहा, “संयुक्त यरुशलम इजरायल की अविभाजित राजधानी है और इस पर इजरायल की पूरी संप्रभुता है। किसी भी विदेशी गतिविधि से इजरायल की संप्रभुता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

​लेबर सरकार पर हमला: सार ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सहमति के बाद यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इजरायल को ब्रिटिश जनता से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन वहां की लेबर सरकार लगातार इजरायल-विरोधी और शत्रुतापूर्ण निर्णय ले रही है।

​3. तनाव का मुख्य कारण

​ब्रिटेन की लेबर सरकार ने वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों में निर्मित उत्पादों पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, जिन्हें ब्रिटेन ‘अवैध’ मानता है। इसके अलावा ब्रिटिश ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड ने वेस्ट बैंक में हिंसक इजरायली बसने वालों के कृत्यों को ‘जातीय सफाया’ (Ethnic Cleansing) करार दिया था, जिसके बाद इजरायल ने यह आक्रामक कूटनीतिक कदम उठाया है।

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