उत्तराखंड में जनगणना के दूसरे चरण की तिथियां घोषित: 1 दिसंबर 2026 से होगी आबादी की गणना; 35 हजार कार्मिकों के लिए शासन ने जारी की SOP
उत्तराखंड में जनगणना के दूसरे चरण की तिथियां घोषित: 1 दिसंबर 2026 से होगी आबादी की गणना; 35 हजार कार्मिकों के लिए शासन ने जारी की SOP
देहरादून: भारत सरकार द्वारा गजट नोटिफिकेशन जारी किए जाने के बाद उत्तराखंड में जनगणना (Census) के दूसरे चरण की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। प्रदेश में 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक आबादी की गणना की जाएगी। राज्य की लगभग 1.27 करोड़ जनता की गणना के लिए करीब 35,000 कार्मिकों की तैनाती की जाएगी।
इस विशाल प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जनगणना सचिव दीपक कुमार की ओर से विस्तृत एसओपी (SOP – Standard Operating Procedure) जारी की गई है।
1. मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक
PCO के साथ संवाद: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राज्य के सभी ‘प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर्स’ (जिलाधिकारी और नगर आयुक्त) वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
तकनीकी व मैनपावर प्रबंधन: जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक ने जनगणना के दूसरे चरण से जुड़ी गतिविधियों, मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और मैनपावर डिप्लॉयमेंट की एसओपी से सभी अधिकारियों को अवगत कराया।
2. कार्मिकों और शिक्षकों की तैनाती से जुड़े मुख्य नियम (SOP)
शिक्षकों की ड्यूटी और निकटतम ब्लॉक: स्कूलों के प्रधानाचार्य सभी शिक्षकों व कर्मचारियों की सूची (नाम, पदनाम, एम्प्लॉई आईडी, मोबाइल नंबर) खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को देंगे। कार्मिकों को उनके कार्यस्थल/विद्यालय के निकटतम ‘गणना ब्लॉक’ (Enumeration Block) में ही ड्यूटी दी जाएगी।
एकल शिक्षक वाले स्कूल रहेंगे मुक्त: जिन विद्यालयों में केवल एक ही शिक्षक (Single Teacher) कार्यरत हैं, उन्हें जनगणना ड्यूटी से पूरी तरह मुक्त रखा जाएगा ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
सुपरवाइजर और रिजर्व कार्मिकों के नियम: सुपरवाइजर स्तर के शिक्षक अपने शिक्षण कार्य के साथ-साथ जनगणना दायित्व (प्रगणक को ब्लॉक पहचान कराना और 20% डेटा सत्यापन) संभालेंगे। रिजर्व श्रेणी के कार्मिक जब तक पूर्ण ड्यूटी पर न हों, वे अपने नियमित कार्य से छूट का दावा नहीं कर सकेंगे।
अन्य विभागों से सहयोग अनिवार्य: राज्य और केंद्र सरकार के सभी विभागों, स्थानीय निकायों और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों को कर्मचारियों की सूची चार्ज अधिकारियों को सौंपना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने वाले विभागाध्यक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
3. ड्यूटी से छूट और मेडिकल बोर्ड के कड़े नियम
मेडिकल बोर्ड का गठन: चुनाव प्रक्रिया की तर्ज पर केवल गंभीर चिकित्सीय आधार पर छूट मांगने वालों के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा, जिसकी संस्तुति पर ही निर्णय होगा।
गैर-चिकित्सीय छूट: गैर-चिकित्सीय कारणों से छूट देने का अधिकार केवल प्रधान जनगणना अधिकारी (DM) की पूर्व स्वीकृति के बाद ही चार्ज अधिकारी को होगा। प्रशिक्षण (Training) प्राप्त करने के बाद अति-आपात स्थिति को छोड़कर किसी को ड्यूटी से छूट नहीं मिलेगी।
