Wednesday, September 9, 2026
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उत्तराखंड में जनगणना के दूसरे चरण की तिथियां घोषित: 1 दिसंबर 2026 से होगी आबादी की गणना; 35 हजार कार्मिकों के लिए शासन ने जारी की SOP

उत्तराखंड में जनगणना के दूसरे चरण की तिथियां घोषित: 1 दिसंबर 2026 से होगी आबादी की गणना; 35 हजार कार्मिकों के लिए शासन ने जारी की SOP

​देहरादून: भारत सरकार द्वारा गजट नोटिफिकेशन जारी किए जाने के बाद उत्तराखंड में जनगणना (Census) के दूसरे चरण की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। प्रदेश में 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक आबादी की गणना की जाएगी। राज्य की लगभग 1.27 करोड़ जनता की गणना के लिए करीब 35,000 कार्मिकों की तैनाती की जाएगी।

​इस विशाल प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू रूप से संचालित करने के लिए जनगणना सचिव दीपक कुमार की ओर से विस्तृत एसओपी (SOP – Standard Operating Procedure) जारी की गई है।

​1. मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक

​PCO के साथ संवाद: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राज्य के सभी ‘प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर्स’ (जिलाधिकारी और नगर आयुक्त) वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

​तकनीकी व मैनपावर प्रबंधन: जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक ने जनगणना के दूसरे चरण से जुड़ी गतिविधियों, मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और मैनपावर डिप्लॉयमेंट की एसओपी से सभी अधिकारियों को अवगत कराया।

​2. कार्मिकों और शिक्षकों की तैनाती से जुड़े मुख्य नियम (SOP)

​शिक्षकों की ड्यूटी और निकटतम ब्लॉक: स्कूलों के प्रधानाचार्य सभी शिक्षकों व कर्मचारियों की सूची (नाम, पदनाम, एम्प्लॉई आईडी, मोबाइल नंबर) खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को देंगे। कार्मिकों को उनके कार्यस्थल/विद्यालय के निकटतम ‘गणना ब्लॉक’ (Enumeration Block) में ही ड्यूटी दी जाएगी।

​एकल शिक्षक वाले स्कूल रहेंगे मुक्त: जिन विद्यालयों में केवल एक ही शिक्षक (Single Teacher) कार्यरत हैं, उन्हें जनगणना ड्यूटी से पूरी तरह मुक्त रखा जाएगा ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

​सुपरवाइजर और रिजर्व कार्मिकों के नियम: सुपरवाइजर स्तर के शिक्षक अपने शिक्षण कार्य के साथ-साथ जनगणना दायित्व (प्रगणक को ब्लॉक पहचान कराना और 20% डेटा सत्यापन) संभालेंगे। रिजर्व श्रेणी के कार्मिक जब तक पूर्ण ड्यूटी पर न हों, वे अपने नियमित कार्य से छूट का दावा नहीं कर सकेंगे।

​अन्य विभागों से सहयोग अनिवार्य: राज्य और केंद्र सरकार के सभी विभागों, स्थानीय निकायों और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों को कर्मचारियों की सूची चार्ज अधिकारियों को सौंपना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने वाले विभागाध्यक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

​3. ड्यूटी से छूट और मेडिकल बोर्ड के कड़े नियम

​मेडिकल बोर्ड का गठन: चुनाव प्रक्रिया की तर्ज पर केवल गंभीर चिकित्सीय आधार पर छूट मांगने वालों के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा, जिसकी संस्तुति पर ही निर्णय होगा।

​गैर-चिकित्सीय छूट: गैर-चिकित्सीय कारणों से छूट देने का अधिकार केवल प्रधान जनगणना अधिकारी (DM) की पूर्व स्वीकृति के बाद ही चार्ज अधिकारी को होगा। प्रशिक्षण (Training) प्राप्त करने के बाद अति-आपात स्थिति को छोड़कर किसी को ड्यूटी से छूट नहीं मिलेगी।

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