Wednesday, September 9, 2026
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उत्तराखंड

लालढांग: रवासन नदी पर पुल निर्माण को लेकर उग्र हुआ जनाक्रोश; विधायक अनुपमा रावत ने 10 दिन का अल्टीमेटम देकर दी आमरण अनशन की चेतावनी

लालढांग: रवासन नदी पर पुल निर्माण को लेकर उग्र हुआ जनाक्रोश; विधायक अनुपमा रावत ने 10 दिन का अल्टीमेटम देकर दी आमरण अनशन की चेतावनी

​हरिद्वार/लालढांग: हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के लालढांग में रवासन नदी पर झूला पुल (Cable Bridge) निर्माण की मांग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया है। हाल ही में स्कूल से लौटते समय नदी के तेज बहाव में बहने से छात्र आर्यन भट्ट की दुखद मौत और एक अन्य ग्रामीण के लापता होने की घटना के बाद स्थानीय निवासियों का आक्रोश फूट पड़ा है। बुधवार को क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने समर्थकों और ग्रामीणों के साथ रवासन नदी तट पर जोरदार प्रदर्शन किया।

​1. विधायक अनुपमा रावत की प्रमुख मांगें व अल्टीमेटम

​10 दिन में निर्माण शुरू करने की मांग: विधायक अनुपमा रावत ने शासन-प्रशासन को 10 दिनों के भीतर रवासन नदी पर पुल का निर्माण कार्य शुरू करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है।

​आमरण अनशन की चेतावनी: उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 10 दिनों में कार्य धरातल पर शुरू नहीं हुआ, तो वे रवासन नदी के किनारे ही समर्थकों के साथ आमरण अनशन पर बैठेंगी।

​दिवंगत छात्र के नाम पर हो पुल का नाम: विधायक ने मांग रखी कि निर्मित होने वाले पुल का नामकरण हादसे में जान गंवाने वाले छात्र ‘आर्यन भट्ट’ के नाम पर किया जाए।

​2. बजट में अटका प्रोजेक्ट और सरकार पर उपेक्षा का आरोप

​स्वीकृति के बावजूद अटका बजट: अनुपमा रावत के अनुसार, वन विभाग और जिला प्रशासन से पुल निर्माण के लिए आवश्यक स्वीकृतियां मिल चुकी हैं, लेकिन प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा शासन स्तर से बजट जारी नहीं किया जा रहा है।

​हरीश रावत सरकार के समय हुई थी घोषणा: उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने लालढांग क्षेत्र के लिए इस पुल को स्वीकृत किया था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद से यह परियोजना अधर में लटकी हुई है।

​दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित: रवासन नदी के दोनों ओर मीठीबेरी, रसूलपुर बड़ा, रसूलपुर छोटा और लालढांग समेत दर्जनों गांव बसे हैं। मानसून के दौरान पहाड़ों से आने वाले उफान के कारण ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।

​3. स्थानीय ग्रामीणों व नेताओं का आक्रोश

​प्रशासनिक उपेक्षा से ग्रामीण परेशान: स्थानीय निवासी रामजी देवी और कांग्रेस नेता गुरजीत लहरी ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन यूपी सीमा से सटे इस दूरस्थ क्षेत्र की ‘डबल इंजन सरकार’ में लगातार अनदेखी की जा रही है।

​हॉट सीट रही है हरिद्वार ग्रामीण: उल्लेखनीय है कि हरिद्वार ग्रामीण एक हाई-प्रोफाइल सीट है। वर्ष 2017 में भाजपा के स्वामी यतीश्वरानंद ने तत्कालीन सीएम हरीश रावत को यहां से हराया था, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में हरीश रावत की पुत्री अनुपमा रावत ने स्वामी यतीश्वरानंद को पराजित कर इस सीट पर जीत दर्ज की थी।

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