Wednesday, September 9, 2026
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उत्तराखंड में बिना मान्यता चल रहे 107 मदरसे बंद: 17 सील, 100 से अधिक ने किया आवेदन; अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण लागू होने के बाद धामी सरकार का बड़ा एक्शन

उत्तराखंड में बिना मान्यता चल रहे 107 मदरसे बंद: 17 सील, 100 से अधिक ने किया आवेदन; अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण लागू होने के बाद धामी सरकार का बड़ा एक्शन

​देहरादून: उत्तराखंड में निर्धारित शैक्षणिक मानकों और मान्यता नियमों का अनुपालन न करने वाले गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के खिलाफ राज्य सरकार का चाबुक लगातार चल रहा है। प्रदेश में 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड को समाप्त कर ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ (Minority Education Authority) लागू किए जाने के बाद से अब तक 107 बिना मान्यता वाले मदरसों पर ताला लग चुका है। इनमें से 17 मदरसों को प्रशासन ने सील किया है, जबकि 3 प्रबंधकों ने स्वयं संचालन बंद करने की लिखित सूचना दी है।

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और निर्धारित मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

​1. जिलों में मदरसों की स्थिति और कार्रवाई का ब्योरा

​हरिद्वार (सबसे अधिक असर): जिले में कुल 269 मदरसों में से 102 मदरसे बंद हो चुके हैं। 76 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, 45 पंजीकृत हैं और 46 का निरीक्षण लंबित है।

​ऊधमसिंह नगर: कुल 119 मदरसों में से 5 बंद कराए जा चुके हैं।

​नैनीताल: 18 मदरसों में से 12 ने मान्यता के लिए आवेदन जमा किया है।

​अन्य जिले: चंपावत में 2 और पिथौरागढ़ में 1 मदरसा संचालित है।

​2. मदरसा बोर्ड समाप्त: अब शिक्षा विभाग और प्राधिकरण से मान्यता अनिवार्य

​नया नियम (1 जुलाई 2026 से लागू): 30 जून 2026 को मदरसा बोर्ड पूरी तरह समाप्त होने के बाद अब मदरसों को पहले शिक्षा विभाग से एफिलिएशन (संबद्धता) और फिर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

​वर्तमान स्थिति: प्रदेश के 35 मदरसों को शिक्षा विभाग से एफिलिएशन मिलने के बाद प्राधिकरण से मान्यता जारी की जा चुकी है, जबकि 100 से अधिक संस्थानों के आवेदन प्रक्रियाधीन हैं।

​3. नामांकित बच्चों की पढ़ाई नहीं होगी बाधित

​अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि बंद किए गए 100 से अधिक मदरसों में नामांकित छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्देश जारी किए गए हैं:

​सरकारी स्कूलों में ट्रांसफर: सभी संबंधित जिला अल्पसंख्यक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित बच्चों का दाखिला नजदीकी सरकारी स्कूलों या पंजीकृत मदरसों में कराया जाए।

​सभी 6 अल्पसंख्यक समुदायों पर लागू: यह पारदर्शी व्यवस्था केवल मदरसों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के सभी 6 अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों के लिए अनिवार्य बनाई गई है।

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