यूनिसेफ (UNICEF) रिपोर्ट: डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया पर हर 5 में से 1 बच्चा यौन शोषण का शिकार; 21 देशों में 2 करोड़ बच्चे प्रभावित
यूनिसेफ (UNICEF) रिपोर्ट: डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया पर हर 5 में से 1 बच्चा यौन शोषण का शिकार; 21 देशों में 2 करोड़ बच्चे प्रभावित
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) द्वारा जारी एक नई और चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, 21 देशों में 12 से 17 वर्ष की आयु के लगभग 2 करोड़ बच्चे (प्रति पांच में से एक) सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के ज़रिये यौन शोषण का शिकार हुए हैं। यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने इसे एक बेहद पीड़ादायक सच्चाई बताते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित बनाने और कड़े कानून लागू करने की मांग की है।
1. ऑनलाइन शोषण के प्रमुख आंकड़े और स्वरूप
अनुचित सामग्री थोपना: 1.5 करोड़ से अधिक बच्चों को उनकी इच्छा के विरुद्ध यौन सामग्री दिखाई गई।
दबाव और ब्लैकमेल: लगभग 90 लाख बच्चों से यौन बातचीत या तस्वीरें साझा करने के लिए कहा गया।
सहमति के बिना तस्वीरें शेयर होना: लगभग 40 लाख बच्चों की निजी तस्वीरें उनकी मर्जी के बिना ऑनलाइन साझा की गईं।
वास्तविक आंकड़ा अधिक होने की आशंका: यूनिसेफ के अनुसार, बहुत से मामले सामने न आने के कारण वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
2. सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग का माध्यम
सोशल मीडिया का प्रभुत्व: रिपोर्ट में दर्ज यौन शोषण के लगभग 60% मामले Facebook, Instagram, Snapchat, TikTok और WhatsApp जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से जुड़े थे। (मोंटेनेग्रो में यह आंकड़ा 80% से अधिक था)।
अन्य माध्यम: 14% मामले ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स के ज़रिये दर्ज किए गए।
पहचान छिपाकर संपर्क: 38% बच्चों से अपराधियों ने पहली बार ऑनलाइन संपर्क किया, जबकि 57% मामलों में अपराधी बच्चों के परिचित, दोस्त या परिवार के सदस्य ही थे।
3. बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर
आत्म-हानि और आत्महत्या का जोखिम: ऑनलाइन शोषण झेलने वाले बच्चों में आम बच्चों की तुलना में आत्महत्या के विचार, आत्मघाती व्यवहार और आत्म-हानि का खतरा 4 गुना अधिक पाया गया। (पाकिस्तान में यह जोखिम 7 गुना से अधिक देखा गया)।
भावनात्मक आघात: पीड़ितों में अवसाद, चिंता, डर, शर्म और अकेलेपन जैसी भावनाएं देखी गईं। डोमिनिकन गणराज्य की एक 14 वर्षीय पीड़िता ने बताया कि सहमति के बिना फोटो वायरल होने के बाद वह पूरी तरह सदमे में चली गई थी।
4. मदद पाने में लाचारी और रिपोर्ट न होना
खामोशी: 40% से अधिक मामलों में बच्चों ने अपने साथ हुए शोषण के बारे में किसी को भी नहीं बताया।
अधिकारियों तक पहुंच: 1% से भी कम मामलों की आधिकारिक सूचना पुलिस या संबंधित अधिकारियों तक पहुँच सकी।
वजह: बच्चों को यह जानकारी ही नहीं होती कि संकट के समय वे किससे मदद माँगें या शिकायत कहाँ दर्ज कराएँ।
5. यूनिसेफ की प्रमुख सिफारिशें और बचाव के उपाय
तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स अपने सुरक्षा फीचर्स को सख्त बनाएं, डिफॉल्ट सेफ्टी सेटिंग्स लागू करें और शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को आसान बनाएं।
कड़े कानून और क्रियान्वयन: सरकारें टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ ऑनलाइन अपराधों से निपटने के लिए कानूनी व्यवस्था मजबूत करें।
सामाजिक जागरूकता: लड़कियों के यौनिकरण को सामान्य बनाने वाली हानिकारक लैंगिक धारणाओं को खत्म किया जाए और पीड़ितों को कलंकित करने के बजाय उनका सहयोग किया जाए।
