उत्तराखंड

उत्तराखंड: ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ और हिमालय दिवस पर ₹1 करोड़ का ऐलान

उत्तराखंड: ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ और हिमालय दिवस पर ₹1 करोड़ का ऐलान

​देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार, 7 सितंबर को राज्य के युवाओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी दो बड़ी सौगातों का ऐलान किया। एक तरफ जहाँ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ किया, वहीं दूसरी तरफ हिमालय दिवस के अवसर पर ‘हिमालय विभूति सम्मान’ शुरू करने की घोषणा की।

​1. मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना: निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग

​उद्देश्य: आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के प्रतिभाशाली छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए घर बैठे गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराना।

​शामिल परीक्षाएं: राज्य के विश्वविद्यालयों व सरकारी/सहायता प्राप्त कॉलेजों के छात्रों को यूपीएससी (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोग (UKPSC), सीडीएस (CDS), बैंकिंग, रेलवे और एसएससी (SSC) जैसी परीक्षाओं की कोचिंग दी जाएगी।

​उच्च शिक्षा व पात्रता परीक्षाएं: इसके साथ ही CAT, MAT, GATE, NET और CSIR-NET की तैयारी के लिए भी नि:शुल्क मार्गदर्शन मिलेगा।

​2. ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम और प्रमुख घोषणाएं

​देहरादून स्थित वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

​’हिमालय विभूति सम्मान’: हिमालय संरक्षण, संवर्धन और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शोधकर्ताओं को प्रतिवर्ष हिमालय दिवस पर यह सम्मान दिया जाएगा।

​₹1 करोड़ का अनुदान: हिमालय परिषद् में बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये की धनराशि की घोषणा की गई।

​पोस्टर व पत्रिका विमोचन: सीएम धामी ने 7वें देहरादून इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग सहित 5 पोस्टरों और ‘विज्ञान संप्रेषण’ पत्रिका के 5वें वार्षिकांक का विमोचन किया।

​3. विकास का मंत्र: ‘इकोलॉजी और इकोनॉमी’ का संतुलन

​साझा जिम्मेदारी: मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर ग्लेशियरों, जल स्रोतों और पर्वतीय जीवन पर साफ दिख रहा है। विकास का मॉडल ऐसा होना चाहिए जिससे नदियाँ निर्मल रहें, जंगल बचें और रोजगार भी बढ़े।

​जनभागीदारी पर जोर: 2 सितंबर (बुग्याल दिवस) से 9 सितंबर (हिमालय दिवस) तक ‘हिमालय दिवस सप्ताह’ के रूप में मनाया जा रहा है, ताकि हिमालय संरक्षण को एक जन-आंदोलन बनाया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *