देहरादून-मसूरी मार्ग पर भूस्खलन की जांच शुरू: ERT तकनीक से तलाशी जाएगी पहाड़ के भीतर पानी की मौजूदगी; अवैध निर्माण भी जांच के दायरे में
देहरादून-मसूरी मार्ग पर भूस्खलन की जांच शुरू: ERT तकनीक से तलाशी जाएगी पहाड़ के भीतर पानी की मौजूदगी; अवैध निर्माण भी जांच के दायरे में
देहरादून: देहरादून-मसूरी मार्ग पर पानी वाले बैंड और गलोगीधार क्षेत्र के बीच लगातार हो रहे भूस्खलन और सड़क धंसने की असली वजह का पता लगाने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने विस्तृत वैज्ञानिक जांच कराने का फैसला लिया है। विभाग को आशंका है कि पहाड़ के भीतर पानी का जमाव, किसी नई जलधारा या प्राकृतिक स्प्रिंग (झरने) के सक्रिय होने से मिट्टी लगातार कमजोर हो रही है।
चीफ इंजीनियर दयानंद के निरीक्षण के बाद अब केंद्रीय और राज्य स्तरीय भूस्खलन विशेषज्ञों की टीम मौके पर सर्वे कर रही है।
1. इलेक्ट्रिकल रेसिस्टिविटी टोमोग्राफी (ERT) तकनीक से जांच
पहाड़ के अंदर की जांच: सड़क के बड़े हिस्से के धंसने के बाद विभाग इलेक्ट्रिकल रेसिस्टिविटी टोमोग्राफी (ERT) तकनीक का इस्तेमाल करेगा, जिससे पहाड़ के भीतर की संरचना और भूमिगत जल के दबाव का पता चलेगा।
झील या नदी बनने की आशंका: पानी वाले बैंड के ऊपरी हिस्से में किसी झील या जल संरचना बनने की खबरें आई हैं। यदि अंदर पानी का दबाव पाया जाता है, तो सुरक्षित जल निकासी और पहाड़ के ट्रीटमेंट की योजना बनाई जाएगी।
2. तत्काल और स्थायी उपाय
नालियों और कल्वर्ट की सफाई प्राथमिक काम: पानी के अनियंत्रित बहाव को रोकने के लिए सड़क किनारे बंद पड़े कल्वर्ट और नालियों को तुरंत खोलने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बारिश का पानी पहाड़ के भीतर न रिसे।
बैक कटिंग की संभावना: तकनीकी रूप से संभव होने पर पहाड़ की कटिंग (बैक कटिंग) कर सड़क को नए सिरे से तैयार करने की योजना है। हालांकि, स्थायी पुनर्निर्माण वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही किया जाएगा।
3. अवैध निर्माण और अतिक्रमण की भी होगी जांच
निर्माण गतिविधियों पर नजर: प्रभावित क्षेत्र के आसपास बने निर्माण और अतिक्रमण की शिकायतों को भी जांच में शामिल किया गया है।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई: चीफ इंजीनियर ने स्पष्ट किया कि नियमों के विपरीत पाए जाने वाले निर्माणों पर कार्रवाई होगी। हालांकि प्रारंभिक जांच में हाल के 6 महीनों में बने किसी नए निर्माण के धंसने के सबूत नहीं मिले हैं और आसपास के ढाँचे करीब 2 साल पुराने बताए जा रहे हैं।
