नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण का काम तेज: मेयर ने कहा—’भारत रहा सच्चा मित्र’, सेना बना रही 57.5 मीटर लंबा पुल
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण का काम तेज: मेयर ने कहा—’भारत रहा सच्चा मित्र’, सेना बना रही 57.5 मीटर लंबा पुल
काठमांडू: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद अब जनजीवन को पटरी पर लाने और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण का काम युद्धस्तर पर शुरू हो गया है। इस आपदा में 1,252 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। संकट की इस घड़ी में नेपाल ने त्वरित राहत और आर्थिक सहायता भेजने के लिए भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है।
1. बिदुर नगर पालिका में भारी तबाही, 3,000 लोग राहत शिविरों में
10 वार्ड पूरी तरह प्रभावित: बिदुर नगर पालिका के मेयर राजन श्रेष्ठ ने बताया कि नेपाल ने अपने इतिहास में ऐसी व्यापक तबाही पहले कभी नहीं देखी। नगर पालिका के 13 में से 10 वार्ड बाढ़ से पूरी तरह तबाह हो चुके हैं।
राहत शिविर: क्षेत्र में 17 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां फिलहाल 3,000 से अधिक विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं। अब नगर पालिका का पूरा ध्यान पुनर्वास और इंफ्रास्ट्रक्चर की बहाली पर है।
2. भारत की मदद पर जताया आभार
’सच्चा मित्र है भारत’: मेयर राजन श्रेष्ठ ने कहा, “भारत हमेशा से नेपाल का सच्चा मित्र रहा है। 2015 के विनाशकारी भूकंप की तरह ही इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों के लिए लगातार सहायता भेज रहे हैं। इसके लिए हम उनके आभारी हैं।”
3. नेपाल सेना बना रही 70 टन क्षमता का लोहे का पुल
सड़क संपर्क बहाल करने की कवायद: देविघाट को गुल्ची के रास्ते काठमांडू से जोड़ने वाला पुल बाढ़ में बह गया था। अब नेपाल सेना की ब्रिजिंग यूनिट वहां 57.5 मीटर लंबा और 70 टन क्षमता वाला स्टील का पुल तैयार कर रही है।
5 दिनों में पूरा होगा निर्माण: ब्रिज कमांडर मेजर चिरंजीवी चौलागाईं ने बताया कि रोलर लेआउट सिस्टम तैयार किया जा चुका है और अगले पांच दिनों के भीतर पुल का निर्माण कार्य पूरा कर यातायात बहाल कर दिया जाएगा।
4. मोर्चरी के बाहर अपनों की तलाश जारी
काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल (TUTH) की मोर्चरी के बाहर अब भी परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। रसुवा और त्रिशूली क्षेत्र से लापता हुए सैकड़ों लोगों के परिजन लगातार शवों की शिनाख्त के लिए अस्पतालों और राहत केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं।
