नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 1,100 के पार; पीएम बालेंद्र शाह ने जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक समुदाय का ध्यान खींचा
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से मौतों का आंकड़ा 1,100 के पार; पीएम बालेंद्र शाह ने जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक समुदाय का ध्यान खींचा
काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) को आठ दिन बीत जाने के बाद भी तबाही का मंजर बना हुआ है। प्रतिनिधि सभा (संसद) को संबोधित करते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बताया कि आपदा में मृतकों की संख्या 1,114 तक पहुंच गई है, जबकि 3,916 लोग अभी भी लापता हैं। पीएम शाह ने इस आपदा को हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ता गंभीर खतरा बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होने की अपील की है।
बाढ़ का मुख्य कारण और तबाही का घटनाक्रम
विशेषज्ञों और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार:
हिमस्खलन से बना प्राकृतिक बांध: नेपाल-चीन सीमा के पास भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ‘लेंगडे खोला’ में हिमस्खलन (Avalanche) के कारण पानी का एक प्राकृतिक अवरोध बन गया था।
बांध टूटने से तबाही: पानी का दबाव बढ़ने पर यह प्राकृतिक बांध टूट गया, जिससे भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा नीचे त्रिशूली नदी की ओर तेजी से बढ़ा। रास्ते में आने वाली बस्तियों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
संसद में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के संबोधन के मुख्य बिंदु
जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय अपील:
पीएम शाह ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।
उन्होंने कहा कि नेपाल इस आपदा की गंभीरता को वैश्विक मंचों पर मजबूती से रखेगा, क्योंकि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।
सुरक्षा कर्मियों की मुस्तैदी:
समय पर चेतावनी न मिलने के आरोपों को खारिज करते हुए शाह ने कहा कि जानकारी मिलते ही सुरक्षा बलों को अलर्ट के लिए भेजा गया था, लेकिन आपदा की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ जवान खुद अभियान के दौरान लापता हो गए।
अंतरराष्ट्रीय सहायता और भारत-चीन का आभार:
अंतरराष्ट्रीय सहायता की स्वीकार्यता: पीएम ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज किया जिनमें कहा गया था कि सरकार विदेशी मदद लेने से हिचकिचा रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआत से ही मित्र देशों के साथ समन्वय किया जा रहा था।
भारत और चीन की त्वरित मदद: शाह ने भारत और चीन का विशेष आभार व्यक्त किया। दोनों पड़ोसी देशों ने आपदा के पहले ही दिन से तकनीकी विशेषज्ञ और हवाई सर्वे टीम भेजी थी, जिन्होंने नेपाली सेना के साथ मिलकर हालात का आकलन किया।
भौगोलिक चुनौतियां: उन्होंने बताया कि भारी कीचड़ और मलबे के कारण मशीनों और हेलीकॉप्टरों को उतरने के लिए स्थिर जमीन नहीं मिल पा रही थी। बचावकर्मियों ने रेंगकर प्रभावित इलाकों तक पहुंचने का प्रयास किया।
वैश्विक सहयोग:
प्रधानमंत्री ने सहायता के लिए भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, यूएई, कतर, स्विट्जरलैंड, सिंगापुर, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ-साथ विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (ADB), यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र (UN) का विशेष रूप से धन्यवाद किया।
