H-1B वीजा पर 1,03,265 डॉलर अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव, भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है बड़ा असर
H-1B वीजा पर 1,03,265 डॉलर अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव, भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है बड़ा असर
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा की कैप-सब्जेक्ट याचिकाओं पर 1,03,265 डॉलर का अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी कुशल कर्मचारियों, खासकर भारतीय पेशेवरों को नियुक्त करना काफी महंगा हो सकता है।
अभी प्रस्ताव लागू नहीं हुआ है
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के प्रस्ताव के मुताबिक, यह शुल्क सभी कैप-सब्जेक्ट H-1B याचिकाओं पर लागू होगा। इसमें अमेरिकी संस्थानों से मास्टर डिग्री या उससे अधिक योग्यता रखने वालों के लिए उपलब्ध 20,000 वीजा वाली ‘एडवांस्ड डिग्री’ श्रेणी भी शामिल होगी।
हालांकि, यह अभी अंतिम नियम नहीं है। प्रस्ताव के फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित होने के बाद 30 दिनों तक सार्वजनिक टिप्पणियां और आपत्तियां मांगी जाएंगी।
सरकार को हर साल 8.8 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय का अनुमान
DHS का अनुमान है कि प्रस्तावित शुल्क से सरकार को हर साल लगभग 8.8 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय हो सकती है। यह अनुमान करीब 85,000 H-1B याचिकाओं के आधार पर लगाया गया है।
सरकार का कहना है कि इस राशि का इस्तेमाल कानूनी इमिग्रेशन व्यवस्था की लागत पूरी करने में किया जाएगा। इसमें आवेदन की जांच, धोखाधड़ी की पहचान, राष्ट्रीय सुरक्षा जांच, सरकारी प्रणालियों का आधुनिकीकरण और रिकॉर्ड प्रबंधन जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
प्रस्ताव के अनुसार, धन का इस्तेमाल इमिग्रेशन अदालतों, वीजा प्रोसेसिंग, श्रम मानकों के पालन और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय जैसी गतिविधियों में भी किया जा सकता है।
किन संस्थाओं को मिलेगी छूट?
यह अतिरिक्त शुल्क उन संस्थाओं पर लागू नहीं होगा जो H-1B कैप से पहले से छूट प्राप्त हैं। इनमें कुछ गैर-लाभकारी शोध संगठन, सरकारी शोध संस्थान और उच्च शिक्षा संस्थान शामिल हैं।
वर्तमान H-1B व्यवस्था में हर साल 65,000 सामान्य वीजा उपलब्ध होते हैं। इसके अलावा अमेरिकी संस्थानों से मास्टर डिग्री या उससे उच्च योग्यता प्राप्त विदेशी नागरिकों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा का प्रावधान है।
छोटी कंपनियों पर भी पड़ेगा असर
DHS के विश्लेषण के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025 में H-1B कैप-सब्जेक्ट याचिकाएं दाखिल करने वाली 28,649 संस्थाओं में से 14,541 छोटी संस्थाएं थीं।
विभाग का अनुमान है कि लगभग 11,051 छोटी संस्थाओं पर इस प्रस्ताव का महत्वपूर्ण आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। यह विश्लेषण में शामिल छोटी संस्थाओं का लगभग 76 प्रतिशत है।
विरोध में उठे सवाल
इमिग्रेशन सुधार संगठन FWD.us के अध्यक्ष टॉड शुल्टे ने प्रस्ताव को अमेरिकी कारोबारों पर भारी बोझ बताया है। उनका तर्क है कि इतनी बड़ी अतिरिक्त लागत अमेरिका की वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने की क्षमता को कमजोर कर सकती है और कंपनियों को नौकरियां तथा कारोबार विदेशों में ले जाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि क्या सरकार H-1B आवेदन की वास्तविक प्रोसेसिंग लागत से कहीं अधिक राशि वसूलने का कानूनी अधिकार रखती है।
दूसरी ओर, DHS का कहना है कि अमेरिकी इमिग्रेशन कानून सरकार को ऐसे शुल्क निर्धारित करने की अनुमति देता है, जिनसे इमिग्रेशन और नागरिकता सेवाओं की कुल लागत की भरपाई की जा सके।
फिलहाल 1,03,265 डॉलर का शुल्क प्रस्तावित है, लागू नहीं। अंतिम फैसला सार्वजनिक टिप्पणियों की प्रक्रिया और उसके बाद होने वाली सरकारी कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
